West Bengal News: पश्चिम बंगाल में बकरीद से पहले सियासी माहौल पूरी तरह गरमा गया है। तृणमूल कांग्रेस के नेता हुमायूं कबीर के एक विवादित बयान ने राज्य में नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने शुभेंदु अधिकारी को खुली चुनौती दी है। इस बयान के बाद राजनीतिक दलों में बयानबाजी तेज हो गई है।
हुमायूं कबीर ने शुभेंदु अधिकारी को चुनौती देते हुए कहा कि वे सड़कों पर नमाज भी पढ़ेंगे और गाय की कुर्बानी भी देंगे। उनके इस आक्रामक तेवर ने कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। भारतीय जनता पार्टी ने इस बयान पर कड़ा ऐतराज जताया है। बीजेपी इसे सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश मान रही है।
ममता सरकार ने जारी की मवेशियों की कुर्बानी पर सख्त गाइडलाइन
दरअसल पश्चिम बंगाल सरकार ने 13 मई को एक नई अधिसूचना जारी की थी। प्रशासन ने सार्वजनिक स्थानों पर गायों की हत्या को लेकर सख्त नियम लागू किए हैं। यह आदेश ठीक बकरीद से पंद्रह दिन पहले आया है। सरकार ने साफ किया कि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर जेल और जुर्माना लगेगा।
नए नियमों के तहत अब किसी भी मवेशी की कुर्बानी बिना फिटनेस सर्टिफिकेट के नहीं होगी। यह प्रमाण पत्र स्थानीय प्रशासन और सरकारी पशु चिकित्सक ही जारी करेंगे। डॉक्टर को यह प्रमाणित करना होगा कि पशु की उम्र 14 साल से अधिक है। वह अब खेती या प्रजनन के काम का नहीं है।
सार्वजनिक स्थानों पर कुर्बानी देने पर सरकार ने लगाई पूरी रोक
सरकारी नियमों के मुताबिक गंभीर रूप से बीमार या लाचार मवेशियों को ही अनुमति मिलेगी। पशु चिकित्सक की हरी झंडी के बाद ही कुर्बानी दी जा सकेगी। सरकार का मुख्य मकसद अवैध तरीके से होने वाली पशु हत्या को रोकना है। साथ ही राज्य में कानून व्यवस्था को मजबूत करना भी है।
प्रशासन ने साफ किया कि सर्टिफिकेट मिलने के बाद भी खुले में कुर्बानी नहीं होगी। इसके लिए केवल सरकार द्वारा अधिकृत बूचड़खानों का ही उपयोग किया जाएगा। विपक्षी दल इस फैसले को धार्मिक मामलों में दखल बता रहे हैं। वहीं कई सामाजिक संगठन इस सरकारी फैसले का खुलकर समर्थन कर रहे हैं।
Author: Sourav Banerjee


