Kerala Election News: केरल की 140 विधानसभा सीटों में से एक पूंजर सीट राज्य की सबसे चर्चित और हाई-प्रोफाइल सीटों में से एक है। कोट्टायम जिले में स्थित इस सीट पर इस बार एक बार फिर त्रिकोणीय और कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है। तीन कद्दावर चेहरों के बीच सीधी टक्कर ने इस सीट को चुनावी केंद्र बना दिया है।
तीन कद्दावर उम्मीदवारों के बीच टक्कर
सत्ताधारीएलडीएफ (वामपंथी गठबंधन) ने अपने वर्तमान विधायक सेबेस्टियन कुलथुंकल पर भरोसा जताया है। वह केरल कांग्रेस (एम) के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। उनके सामने यूडीएफ (कांग्रेस गठबंधन) ने सेबेस्टियन एम.जे. (एडवोकेट साजी जोसेफ) को उतारा है। इस मुकाबले को सबसे ज्यादा चर्चा में लाने वाले उम्मीदवार पी.सी. जॉर्ज हैं, जो इस बार एनडीए (भाजपा गठबंधन) के आधिकारिक उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं। 2021 में निर्दलीय चुनाव हारने के बाद, पी.सी. जॉर्ज अब भाजपा के कमल निशान पर अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।
पूंजर सीट का रोचक इतिहास
1957 मेंराज्य गठन के साथ अस्तित्व में आई इस सीट पर अब तक 16 बार विधानसभा चुनाव (उपचुनावों सहित) हो चुके हैं। शुरुआती दशकों में कांग्रेस और केरल कांग्रेस का दबदबा रहा, लेकिन 1980 के बाद यह सीट पी.सी. जॉर्ज की पहचान बन गई। 2016 का चुनाव इस सीट के इतिहास में सबसे यादगार रहा, जब पी.सी. जॉर्ज ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में लगभग 27 हजार वोटों के अंतर से जीत हासिल की थी। हालांकि, 2021 के चुनावों में वामपंथी लोकतांत्रिक मोर्चे (एलडीएफ) ने इस किले को ढहा दिया और केरल कांग्रेस (एम) के उम्मीदवार ने यहां जीत दर्ज की।
रबर किसान और धार्मिक समीकरण होंगे निर्णायक
पूंजर केचुनाव में धार्मिक और आर्थिक मुद्दे हमेशा हावी रहते हैं। यह क्षेत्र रबर की खेती के लिए जाना जाता है, इसलिए रबर की गिरती कीमतें और किसानों की बदहाली यहां का सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा है। सामाजिक रूप से यहां ईसाई समुदाय की आबादी निर्णायक भूमिका में है, साथ ही मुस्लिम और हिंदू मतदाताओं का भी अच्छा प्रभाव है। तीनों उम्मीदवारों के लिए यह सीट प्रतिष्ठा का सवाल बन गई है। फिलहाल पूंजर में चुनावी माहौल गरमाया हुआ है और सभी पक्षों ने जोर-शोर से प्रचार शुरू कर दिया है।


