New Delhi News: भारतीय रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर की दिग्गज कंपनी आईनॉक्स जीएफएल ग्रुप ने अमेरिका में एक ऐतिहासिक और चौंकाने वाला दांव चला है। इस कंपनी ने अपनी कुल मार्केट वैल्यू से भी ज्यादा पैसा खर्च करके अमेरिका में एक चीनी कंपनी की संपत्तियों को खरीद लिया है। यह डील लगभग 7175 करोड़ रुपये में पूरी हुई है। इससे अमेरिका के सोलर बाजार में भारत की इस प्रमुख कंपनी की पहली और बेहद मजबूत एंट्री हो गई है।
आईनॉक्स ग्रीन एनर्जी की रिन्यूएबल शाखा इनॉक्स क्लीन एनर्जी लिमिटेड ने यह बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने बोविएट सोलर टेक्नोलॉजी एलएलसी की संपत्तियों का अधिग्रहण किया है। बोविएट सोलर पहले चीन के बोवे ग्रुप का एक अहम हिस्सा हुआ करती थी। इस भारी-भरकम डील की कुल कीमत 750 मिलियन डॉलर यानी करीब 7175 करोड़ रुपये आंकी गई है। सबसे ज्यादा हैरानी की बात यह है कि भारतीय कंपनी का मौजूदा मार्केट कैप ही 7082 करोड़ रुपये के आसपास है।
अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना में बड़ा कारोबार
चीन की बोवे ग्रुप द्वारा संचालित बोविएट सोलर टेक्नोलॉजी का मुख्य कार्यालय अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना राज्य में स्थित है। ग्रीनविले में मौजूद यह कंपनी एक बहुत बड़ा सोलर मैन्युफैक्चरिंग प्लेटफॉर्म चलाती है। अमेरिकी सोलर इंडस्ट्री में इस कंपनी का काफी नाम और दबदबा रहा है। यह अमेरिका के सबसे बड़े और मशहूर सोलर मॉड्यूल निर्माताओं में गिनी जाती है। अब इस विशाल कंपनी और इसकी तमाम संपत्तियों का पूरा मालिकाना हक भारतीय कंपनी के पास आ जाएगा।
कंपनी के एक बड़े अधिकारी ने बिजनेसलाइन को बताया कि यह अधिग्रहण दो अलग-अलग हिस्सों में पूरा किया जाएगा। पहले हिस्से में एक चालू 3 गीगावाट मॉड्यूल फैसिलिटी को खरीदा जा रहा है। वहीं दूसरे हिस्से में 3 गीगावाट सेल फैसिलिटी शामिल है जिसका निर्माण अभी चल रहा है। इस पूरी डील के लिए कंपनी किसी बाहरी कर्ज पर निर्भर नहीं है। कंपनी इस डील की ज्यादातर फंडिंग अपने खुद के आंतरिक संसाधनों के जरिए ही करने वाली है।
अमेरिकी नीतियों और एआई बूम का मिलेगा फायदा
इस शानदार अधिग्रहण से भारतीय कंपनी को अमेरिका की सरकारी नीतियों का सीधा फायदा मिलने वाला है। कंपनी को वहां के ‘इन्फ्लेशन रिडक्शन एक्ट’ के सेक्शन 45X के तहत कई आर्थिक मदद और इंसेटिव्स मिलेंगे। इससे वहां स्थानीय स्तर पर उत्पादन करने में कंपनी को आर्थिक रूप से काफी मजबूती मिलेगी। अमेरिकी सरकार आजकल घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को काफी बढ़ावा दे रही है। भारतीय कंपनी के लिए अमेरिकी बाजार में अपने पैर जमाने का यह एकदम सही और सुनहरा मौका है।
आज पूरी दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का चलन बहुत तेजी से बढ़ रहा है। अमेरिका में भी नए एआई प्रोजेक्ट्स और डेटा सेंटरों की संख्या में भारी उछाल आया है। डेटा सेंटर चलाने के लिए बहुत अधिक मात्रा में बिजली की जरूरत होती है। इसलिए वहां ऊर्जा की खपत लगातार बढ़ती ही जा रही है। ऐसे समय में इन सोलर इकाइयों का अधिग्रहण भारत के लिए मास्टरस्ट्रोक है। इन दोनों मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों की कुल उत्पादन क्षमता 6 गीगावाट है।


