गौतम अडानी पर अमेरिका में भारी शिकंजा! ₹1,500 करोड़ के रिश्वत कांड में SEC ने ठोका करोड़ों का जुर्माना

New York News: अमेरिकी प्रतिभूति और विनिमय आयोग (SEC) ने अडानी समूह के चेयरमैन गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए 18 मिलियन डॉलर (लगभग 151 करोड़ रुपये) के नागरिक मौद्रिक दंड का प्रस्ताव रखा है। यह मामला 2021 में अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड द्वारा जारी किए गए बॉन्ड्स के दौरान निवेशकों को गुमराह करने और झूठे बयान देने से जुड़ा है। अमेरिकी एजेंसियों का आरोप है कि अडानी परिवार ने सौर ऊर्जा अनुबंध हासिल करने के लिए रिश्वतखोरी का सहारा लिया।

विदेशी मीडिया और अदालती दस्तावेजों के अनुसार, SEC ने गौतम अडानी पर 6 मिलियन डॉलर और सागर अडानी पर 12 मिलियन डॉलर का जुर्माना लगाने का सुझाव दिया है। यह प्रस्ताव न्यूयॉर्क की पूर्वी जिला अदालत में दायर किए गए अंतिम निर्णयों का हिस्सा है। अमेरिकी अभियोजकों का दावा है कि इन अधिकारियों ने अमेरिकी निवेशकों से अपनी एंटी-ब्राइबरी (रिश्वत विरोधी) नीतियों के बारे में झूठ बोला, जबकि वे पर्दे के पीछे एक बड़ी भ्रष्टाचार योजना का हिस्सा थे।

$265 मिलियन की रिश्वत और $2 बिलियन के मुनाफे का खेल

नवंबर 2024 में पहली बार सार्वजनिक हुए इन आरोपों में कहा गया है कि अडानी समूह ने भारतीय सरकारी अधिकारियों को लगभग 265 मिलियन डॉलर (करीब 2,230 करोड़ रुपये) की रिश्वत देने की साजिश रची थी। इस भारी-भरकम रिश्वत का मकसद एक विशाल सौर ऊर्जा परियोजना के लिए सरकारी अनुबंध सुरक्षित करना था। अमेरिकी जांचकर्ताओं के अनुसार, इस परियोजना से अडानी समूह को अगले दो दशकों में लगभग 2 बिलियन डॉलर का भारी मुनाफा होने की उम्मीद थी।

अमेरिकी अधिकारियों ने आरोप लगाया कि गौतम अडानी, सागर अडानी और अडानी ग्रीन एनर्जी के पूर्व सीईओ वनीत जैन ने कथित भ्रष्टाचार को छिपाकर अंतरराष्ट्रीय बाजार से 3 बिलियन डॉलर से अधिक का कर्ज और बॉन्ड्स जुटाए। इन सभी पर प्रतिभूति धोखाधड़ी (Securities Fraud) और वायर धोखाधड़ी की साजिश रचने के गंभीर आपराधिक आरोप लगाए गए हैं। SEC द्वारा दायर नागरिक मामले में भी इन नामों को धोखाधड़ी के मुख्य साजिशकर्ताओं के रूप में नामित किया गया है।

अडानी समूह के भविष्य और साख पर संकट

इस कानूनी कार्रवाई ने अडानी समूह की वैश्विक साख को एक बार फिर संकट में डाल दिया है। अमेरिकी कानून के तहत, यदि कोई कंपनी अमेरिकी निवेशकों से धन जुटाती है, तो उसे भ्रष्टाचार विरोधी अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है। SEC का प्रस्ताव वैश्विक निवेशकों के बीच एक कड़ा संदेश भेजने की कोशिश है। हालांकि, अडानी समूह ने पहले भी इन आरोपों को निराधार बताया था, लेकिन अब सहमति से दायर किए गए प्रस्तावित निर्णयों ने उनकी मुश्किलों को बढ़ा दिया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस दंड के बाद अडानी समूह के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार से धन जुटाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। अमेरिकी नियामकों की इस कार्रवाई के बाद अन्य देशों की एजेंसियां भी अपनी जांच तेज कर सकती हैं। यह मामला न केवल एक कॉर्पोरेट विवाद है, बल्कि इसने भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक पारदर्शिता को लेकर भी नई बहस छेड़ दी है। अब पूरी दुनिया की नजरें न्यूयॉर्क की अदालत के अंतिम फैसले पर टिकी हैं।

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