Himachal News: हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिले किन्नौर में विश्व प्रसिद्ध किन्नर कैलाश यात्रा पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। स्थानीय लोगों ने अपनी देव आस्था और पारंपरिक मान्यताओं का हवाला देते हुए इस पवित्र यात्रा को हमेशा के लिए रोकने की मांग की है। इसके लिए बाकायदा प्रशासन को ज्ञापन भी सौंपा गया है। पोवारी गांव के कुलदेवता परका शंकर ने अपने ‘गुर’ के माध्यम से यह देव आदेश जारी किया है कि भविष्य में इस यात्रा को बंद कर दिया जाए।
देव आदेश के बाद प्रशासन हुआ सतर्क
देवता के आदेश का सम्मान करते हुए पोवारी के देव कारदारों और प्रतिनिधियों ने डीसी किन्नौर डॉ. अमित कुमार शर्मा को औपचारिक ज्ञापन सौंपा है। स्थानीय लोगों का मानना है कि बाहरी हस्तक्षेप और बढ़ते पर्यटन से क्षेत्र की पवित्रता और प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा है। जनजातीय समाज में देव आदेश को सर्वोच्च माना जाता है। ऐसे में प्रशासन अब फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है। इस संवेदनशील मांग ने सरकार और श्रद्धालुओं के बीच एक नई बहस छेड़ दी है।
डीसी किन्नौर ने स्पष्ट किया कि प्रशासन इस मुद्दे को गंभीरता से ले रहा है। उन्होंने बताया कि इस विषय पर जल्द ही एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई जाएगी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कैबिनेट मंत्री से भी सलाह ली जाएगी। प्रशासन ने स्थानीय लोगों को आश्वासन दिया है कि उनकी देव आस्था को कोई ठेस नहीं पहुंचाई जाएगी। वर्तमान में यात्रा के भविष्य पर अंतिम फैसला सरकारी विमर्श और देव कारदारों के बीच होने वाली महत्वपूर्ण वार्ता पर ही निर्भर करता है।
बेहद दुर्गम और चमत्कारी है यह शिवलिंग
किन्नर कैलाश हिमाचल के किन्नौर जिले में समुद्र तल से हजारों फीट की ऊंचाई पर स्थित है। यहां मौजूद 79 फीट ऊंची प्राकृतिक शिला का आकार त्रिशूल जैसा प्रतीत होता है। यह स्थान इतना दुर्गम है कि यहां पहुंचने के लिए 14 किलोमीटर लंबा कठिन पैदल सफर तय करना पड़ता है। सतलुज नदी के किनारे तांगलिंग गांव से शुरू होने वाला यह ट्रेक बर्फीली चोटियों से घिरा है। दुर्गम रास्ता होने के बावजूद हर साल हजारों श्रद्धालु इस चमत्कारी शिवलिंग के दर्शन को पहुंचते हैं।
आमतौर पर प्रशासन हर साल अगस्त के महीने में करीब 10 दिनों के लिए इस यात्रा का आधिकारिक आयोजन करता है। ट्रेक के दौरान श्रद्धालुओं को मलिंग खटा और फिर पार्वती कुंड जैसे पड़ावों से होकर गुजरना पड़ता है। पार्वती कुंड से एक किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई के बाद ही पवित्र शिवलिंग के दर्शन होते हैं। हालांकि इस साल देव वाणी के कारण यात्रा के आयोजन पर संशय बना हुआ है। अब सभी की निगाहें सरकार द्वारा ली जाने वाली आगामी बैठक के परिणामों पर टिकी हुई हैं।

