India News: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी (NEET-UG) 2026 में पेपर लीक के महाघोटाले ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है। 3 मई को आयोजित हुई इस परीक्षा को बड़े पैमाने पर धांधली के बाद केंद्र सरकार ने रद्द कर दिया है। अब 21 जून को दोबारा परीक्षा कराने का निर्णय लिया गया है। इस बीच आम आदमी पार्टी (AAP) ने मोदी सरकार पर सीधा हमला बोला है। पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकार 23 लाख छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है।
कैसे लीक हुआ पेपर और सीबीआई की जांच
राजस्थान और उत्तराखंड जैसे राज्यों से ‘गेस पेपर’ वायरल होने के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की साख पर सवाल खड़े हो गए। सीबीआई (CBI) की शुरुआती जांच में पता चला कि पेपर लीक का जाल राजस्थान के सीकर जैसे कोचिंग हब्स से फैला था। पेपर कथित तौर पर 2 से 5 लाख रुपये में बेचे गए थे। सीबीआई ने अब तक जयपुर, गुरुग्राम और पुणे से कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है। हालांकि, विपक्ष का आरोप है कि असली मास्टरमाइंड अभी भी कानून की पहुंच से बाहर हैं।
आम आदमी पार्टी का सरकार पर तीखा प्रहार
AAP के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने सरकार की मंशा पर गहरे संदेह व्यक्त किए हैं। ढांडा ने पूछा कि क्या मुख्य साजिशकर्ता पकड़ा गया है या फिर हर साल पेपर लीक कराने वाले बड़े अधिकारी जेल भेजे गए? उन्होंने कहा कि निचले स्तर के कुछ प्यादों की गिरफ्तारी से समस्या हल नहीं होगी। छात्रों के मन में डर है कि 21 जून को होने वाली परीक्षा में भी पेपर नहीं बिकेंगे, इसकी क्या गारंटी है? लाखों छात्र मानसिक तनाव और आर्थिक नुकसान झेलने को मजबूर हैं।
धर्मेंद्र प्रधान का छात्रों को आश्वासन और बड़े सुधार
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने छात्रों को भरोसा दिलाया है कि सरकार पारदर्शिता के प्रति प्रतिबद्ध है। उन्होंने घोषणा की कि 21 जून को होने वाली पुनर्परीक्षा के लिए छात्रों से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। छात्रों को परीक्षा शहर बदलने का विकल्प भी दिया गया है और 14 जून तक नए एडमिट कार्ड जारी कर दिए जाएंगे। मंत्री ने स्वीकार किया कि माफियाओं ने सेंधमारी की कोशिश की है। अगले साल से मानवीय दखल कम करने के लिए परीक्षा पूरी तरह कंप्यूटर आधारित (CBT) होगी।
लाखों छात्रों के भविष्य और साख पर मंडराता संकट
नीट घोटाले के कारण देशभर में विरोध प्रदर्शनों का दौर जारी है। छात्रों में बढ़ती बेचैनी के बीच कुछ दुखद आत्महत्याओं की खबरें भी सामने आई हैं। करोड़ों रुपये की कोचिंग फीस और सालों की मेहनत दांव पर लगी है। विशेषज्ञों का कहना है कि एनटीए को अपनी विश्वसनीयता बहाल करने के लिए इस बार ‘जीरो एरर’ यानी शून्य त्रुटि सुनिश्चित करनी होगी। राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे ने तूल पकड़ लिया है, क्योंकि यह सीधे तौर पर देश के युवा वोट बैंक से जुड़ा मामला है।


