Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की सुक्खू सरकार की ‘इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख सम्मान निधि योजना’ को लेकर बड़ा अपडेट है। महिलाओं को हर महीने 1500 रुपये देने की चुनावी गारंटी पूरी तरह धरातल पर नहीं उतर पाई है। सरकार ने अब इस योजना के नियमों में बड़ा बदलाव कर दिया है। पुरानी प्रक्रिया से किए गए सभी आवेदन रद्द माने जाएंगे। अब महिलाओं को इस सम्मान निधि का लाभ उठाने के लिए नए सिरे से आवेदन करना होगा।
आय प्रमाण पत्र देना होगा अनिवार्य
सरकार ने योजना में अब नई और सख्त शर्त जोड़ दी है। जिन परिवारों की सालाना आय दो लाख रुपये से कम है, केवल उन्हें ही लाभ मिलेगा। अब महिलाओं को अपना आय प्रमाण पत्र भी देना होगा। इसके अलावा बीपीएल श्रेणी को भी इस योजना से जोड़ा जाएगा। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के निदेशक सुमित खिम्टा के अनुसार, योजना के तहत नए फॉर्म भरे जाएंगे। हालांकि, इस पर सरकार के आधिकारिक आदेश का अभी इंतजार है।
आठ लाख महिलाओं के पुराने आवेदन हुए रद्दी
साल 2024 में जब यह योजना शुरू हुई थी, तब प्रक्रिया आसान थी। महिलाओं ने साधारण फॉर्म भरकर तहसील कल्याण अधिकारी के पास जमा किए थे। प्रदेश की करीब आठ लाख महिलाओं ने आवेदन किया था। बाद में सरकार ने नियम बदला और कहा कि आवेदन ग्राम सभाओं से मंजूर होंगे। बार-बार नियम बदलने से लाखों महिलाएं योजना से वंचित रहीं। अब आय सीमा तय होने के बाद पहले भरे गए सभी फॉर्म अमान्य हो गए हैं।
अब तक सिर्फ 36 हजार महिलाओं को मिले पैसे
सुक्खू सरकार के साढ़े तीन साल के कार्यकाल में योजना की रफ्तार बेहद धीमी है। पूरे प्रदेश में अब तक केवल 36 हजार महिलाओं को ही 1500 रुपये मिल पाए हैं। हालांकि, गुरुवार को चंबा जिले के पांगी की महिलाओं को राहत मिली। यहां की 1900 महिलाओं को सरकार ने नौ-नौ हजार रुपये जारी किए हैं। यह राशि दो किस्तों में दी गई है। पिछले साल मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने खुद पांगी जाकर महिलाओं को पैसे बांटे थे।


