New Delhi News: आयकर विभाग ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत देते हुए ITR-1 (Sahaj) और ITR-4 (Sugam) फॉर्म ऑनलाइन उपलब्ध करा दिए हैं। शुक्रवार, 15 मई को विभाग ने जानकारी दी कि अब ई-फाइलिंग पोर्टल पर एक्सेल यूटिलिटी और ऑनलाइन फॉर्म की सुविधा पूरी तरह शुरू हो चुकी है। इसका मतलब है कि वेतनभोगी कर्मचारी और छोटे कारोबारी अब बिना किसी देरी के अपना आयकर रिटर्न फाइल करने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं।
आयकर विभाग आमतौर पर हर साल चरणों में यूटिलिटी जारी करता है, जिसमें सबसे पहले आम नागरिकों और छोटे टैक्सपेयर्स को प्राथमिकता दी जाती है। फिलहाल विभाग ने सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले केवल दो फॉर्म ही लाइव किए हैं। शेष अन्य ITR फॉर्म्स भी आने वाले कुछ हफ्तों में धीरे-धीरे पोर्टल पर एक्टिव कर दिए जाएंगे। समय रहते इन सुविधाओं के शुरू होने से आखिरी दिनों में वेबसाइट पर होने वाले भारी ट्रैफिक के दबाव को कम किया जा सकेगा।
किसे भरना होगा सहज और किसे सुगम फॉर्म?
अगर आप एक रेजिडेंट भारतीय नागरिक हैं और आपकी सालाना कमाई 50 लाख रुपये तक है, तो आपको ITR-1 यानी ‘सहज’ फॉर्म भरना होगा। यह फॉर्म मुख्य रूप से उन लोगों के लिए है जिनकी आय का जरिया सैलरी, एक घर (House Property) और बैंक ब्याज जैसे अन्य स्रोत हैं। हालांकि, यह फॉर्म एनआरआई (NRI) या उन लोगों के लिए नहीं है जो लॉटरी से कमाई करते हैं या जिनके पास एक से ज्यादा घर से होने वाली आय का स्रोत मौजूद है।
दूसरी ओर, ITR-4 यानी ‘सुगम’ फॉर्म उन व्यक्तिगत टैक्सपेयर्स और हिंदू अविभाजित परिवारों (HUF) के लिए है जिनकी कुल आय 50 लाख रुपये तक सीमित है। यह फॉर्म खास तौर पर उन लोगों के लिए डिजाइन किया गया है जिन्होंने इनकम टैक्स एक्ट के तहत ‘प्रिजम्टिव टैक्सेशन’ का विकल्प चुना है। छोटे कारोबारी और फ्रीलांसर अपनी आय का ब्योरा देने के लिए अक्सर इसी फॉर्म का इस्तेमाल करते हैं। एलएलपी (LLP) कंपनियों के लिए यह फॉर्म लागू नहीं होता है।
31 जुलाई है आखिरी तारीख, देरी पर लगेगा जुर्माना
बिना किसी ऑडिट वाले व्यक्तिगत टैक्सपेयर्स के लिए रिटर्न फाइल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई तय की गई है। इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) एक महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेज है, जिसमें आपको अपनी पूरी कमाई और निवेश पर मिलने वाली छूट का सटीक विवरण देना होता है। सही समय पर फॉर्म भरने से आप न केवल भारी जुर्माने से बचते हैं, बल्कि यह भविष्य में लोन लेने या वीजा आवेदन करने जैसे महत्वपूर्ण कामों में भी एक अनिवार्य दस्तावेज के रूप में काम आता है।
टैक्स विशेषज्ञों का मानना है कि टैक्सपेयर्स को आखिरी तारीख का इंतजार करने के बजाय अपनी एक्सेल यूटिलिटी का उपयोग करके जल्द से जल्द फाइलिंग पूरी कर लेनी चाहिए। समय पर रिटर्न फाइल करने से रिफंड की प्रक्रिया भी तेज होती है और गलतियों को सुधारने का पर्याप्त अवसर मिलता है। अगर आपकी आय निर्धारित सीमा से अधिक है, तो देरी से फाइलिंग करने पर आपको ब्याज और पेनाल्टी का सामना करना पड़ सकता है, जिससे आपकी शुद्ध बचत पर असर पड़ेगा।

