New Delhi News: भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 3 रुपये प्रति लीटर की हालिया बढ़ोतरी ने केवल वाहन मालिकों की ही नहीं, बल्कि आम मोबाइल यूजर्स की भी चिंता बढ़ा दी है। ईंधन के दामों में आए इस उछाल का सीधा असर अब टेलीकॉम सेक्टर पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि परिचालन लागत बढ़ने की वजह से टेलीकॉम कंपनियां जल्द ही मोबाइल रिचार्ज प्लान और टैरिफ की कीमतों में इजाफा कर सकती हैं।
देश के प्रमुख महानगरों में ईंधन की नई दरें लागू होने के बाद मुंबई और बेंगलुरु में पेट्रोल की कीमत 107 रुपये प्रति लीटर के करीब पहुंच गई है। वहीं, चेन्नई और कोलकाता जैसे शहरों में डीजल 95 रुपये प्रति लीटर का आंकड़ा पार कर चुका है। इस बढ़ोतरी से माल ढुलाई और यात्रा खर्च तो बढ़ ही रहा है, लेकिन परोक्ष रूप से यह आपके स्मार्टफोन के मंथली बिल को भी प्रभावित करने वाला है, जिससे महंगाई का दोहरा हमला तय माना जा रहा है।
डीजल की बढ़ी लागत कैसे बढ़ाएगी आपका मोबाइल बिल?
मोबाइल नेटवर्क को सुचारू रूप से चलाने के लिए देशभर में लगे टेलीकॉम टावर्स को भारी मात्रा में बिजली और डीजल की जरूरत होती है। रिपोर्ट्स के अनुसार, एक टेलीकॉम कंपनी की कुल ऑपरेटिंग लागत का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा केवल पावर और फ्यूल (ईंधन) पर खर्च होता है। बिजली कटौती के समय टावरों को चालू रखने के लिए डीजल जेनरेटर मुख्य स्रोत होते हैं। ऐसे में डीजल महंगा होने से कंपनियों का सालाना खर्च करोड़ों रुपये बढ़ जाता है।
5G नेटवर्क के विस्तार ने इस दबाव को और अधिक बढ़ा दिया है। 4G की तुलना में 5G टावरों को संचालित करने के लिए कहीं अधिक ऊर्जा और मजबूत बैकअप की आवश्यकता होती है। ईंधन की कीमतों में वृद्धि के कारण 5G इंफ्रास्ट्रक्चर को मेंटेन करना कंपनियों के लिए महंगा सौदा साबित हो रहा है। अंततः कंपनियां इस बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों पर ही डालेंगी, जिससे आने वाले समय में सस्ते रिचार्ज प्लान इतिहास बन सकते हैं।
टैरिफ बढ़ोतरी की तैयारी और ग्राहकों के लिए सुझाव
टेलीकॉम कंपनियां पहले से ही अपने औसत राजस्व (ARPU) को बढ़ाने के लिए टैरिफ में बढ़ोतरी की योजना बना रही थीं। अब ग्लोबल सप्लाई चेन की समस्याओं और स्थानीय स्तर पर ईंधन के दाम बढ़ने से इस फैसले को जल्द लागू किया जा सकता है। विश्लेषकों का संकेत है कि कंपनियां जल्द ही नए रेट चार्ट पेश कर सकती हैं। ऐसे में जो लोग अपने मोबाइल खर्च को नियंत्रित रखना चाहते हैं, उन्हें अभी से सतर्क रहने की जरूरत है।
यूजर्स के लिए यह समय रणनीतिक निर्णय लेने का है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि अगर आप रिचार्ज कराने की सोच रहे हैं, तो टैरिफ बढ़ने से पहले लंबी वैधता (Long-term) वाले प्लान चुनना समझदारी होगी। सालभर या छह महीने वाले प्लान लेकर आप भविष्य में होने वाली संभावित बढ़ोतरी से खुद को बचा सकते हैं। फिलहाल, यह स्पष्ट है कि ईंधन की कीमतों में लगी आग अब आपकी डिजिटल लाइफस्टाइल को भी महंगा बनाने की ओर अग्रसर है।

