California News: दिग्गज टेक कंपनी गूगल अपने करोड़ों यूजर्स के लिए फ्री क्लाउड स्टोरेज के नियमों में एक बड़ा और चौंकाने वाला बदलाव कर रही है। अब तक गूगल हर यूजर को जीमेल, गूगल ड्राइव और फोटोज के लिए 15GB फ्री स्टोरेज देता था। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब नए अकाउंट्स के लिए यह मुफ्त सेवा कुछ शर्तों के साथ आएगी। गूगल का यह कदम सीधे तौर पर उन यूजर्स को प्रभावित करेगा जो बिना व्यक्तिगत जानकारी साझा किए क्लाउड स्पेस का उपयोग करते रहे हैं।
गूगल का नया ‘स्टोरेज टेस्ट’ और फोन नंबर की शर्त
9to5Google की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, गूगल नए यूजर्स के लिए एक विशेष सिस्टम की टेस्टिंग कर रहा है। इसमें फ्री स्टोरेज के दो विकल्प दिए जा रहे हैं। यदि कोई यूजर अपना फोन नंबर लिंक नहीं करता है, तो उसे केवल 5GB फ्री स्टोरेज मिलेगी। वहीं, 15GB का पूरा फायदा उठाने के लिए फोन नंबर जोड़ना अनिवार्य कर दिया गया है। रेडिट पर कई यूजर्स ने नए अकाउंट सेटअप के दौरान इस तरह के नोटिफिकेशंस के स्क्रीनशॉट्स साझा किए हैं।
गूगल इस सख्त नीति के जरिए फर्जी अकाउंट्स और बॉट गतिविधियों पर लगाम लगाना चाहता है। अक्सर लोग कई अकाउंट्स बनाकर बार-बार 15GB फ्री स्टोरेज का फायदा उठाते हैं। फोन नंबर अनिवार्य होने से यह सुनिश्चित होगा कि एक व्यक्ति को एक ही स्टोरेज बेनिफिट मिले। कंपनी ने अपने सपोर्ट पेज पर भी बदलाव किए हैं। मार्च 2026 के आसपास पेज पर ’15GB स्टोरेज’ की जगह ’15GB तक स्टोरेज’ शब्द का इस्तेमाल किया जाने लगा है।
पुराने यूजर्स और भविष्य की तैयारी
फिलहाल यह बदलाव मुख्य रूप से केवल नए गूगल अकाउंट्स बनाने वाले यूजर्स के लिए ही देखा जा रहा है। जिन लोगों के पास पहले से पुराने अकाउंट्स मौजूद हैं, उन्हें अभी घबराने की जरूरत नहीं है। उनके लिए 15GB फ्री स्टोरेज की सुविधा पहले की तरह ही बनी रहेगी। हालांकि, टेक एक्सपर्ट्स का मानना है कि भविष्य में गूगल इसे सभी यूजर्स के लिए अनिवार्य बना सकता है। कंपनी अपनी क्लाउड पॉलिसी को लेकर अब अधिक गंभीर नजर आ रही है।
यदि आपका मौजूदा गूगल स्टोरेज फुल हो रहा है, तो आपके पास सीमित विकल्प बचते हैं। आप या तो गैर-जरूरी फाइल्स और भारी ईमेल्स को डिलीट कर सकते हैं या फिर ‘Google One’ का पेड प्लान ले सकते हैं। नया अकाउंट बनाने वालों को अब अपनी गोपनीयता और स्टोरेज के बीच चुनाव करना होगा। गूगल की इस नई नीति ने डिजिटल दुनिया में प्राइवेसी और मुफ्त सेवाओं के संतुलन को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।

