Himachal News: हिमाचल प्रदेश में पुलिस कर्मचारियों के बस सफर को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब पुलिस कर्मियों को एचआरटीसी बसों में रियायती यात्रा के लिए ‘हिम बस कार्ड’ बनवाना अनिवार्य कर दिया गया है। सरकार ने कार्ड बनाने के लिए लगने वाले दो सौ छत्तीस रुपये के शुल्क और जीएसटी को पूरी तरह से माफ कर दिया है। यह नया नियम सरकारी परिवहन व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए लागू किया गया है।
बिना बस कार्ड देना होगा पूरा किराया
परिवहन निगम ने रियायती सफर के नए नियम स्पष्ट कर दिए हैं। अगर पुलिस कर्मचारी के पास हिम बस कार्ड नहीं होगा, तो उसे पूरा किराया चुकाना होगा। सरकार ने सिर्फ कार्ड बनवाने की फीस में छूट प्रदान की है। हर पुलिस कर्मी को अपना कार्ड बनवाना होगा। इस नई व्यवस्था से निगम के पास सफर करने वाले पुलिस कर्मचारियों का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा।
ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करना होगा आवेदन
पुलिस कर्मचारियों को इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए डिजिटल प्रक्रिया अपनानी होगी। नया कार्ड बनवाने के लिए ऑनलाइन आवेदन करना एकदम अनिवार्य है।
- एचआरटीसी के आधिकारिक हिम बस कार्ड पोर्टल पर जाएं।
- आवेदन फॉर्म भरें और सभी जरूरी दस्तावेज ऑनलाइन जमा करें।
- इस पूरी आवेदन प्रक्रिया के दौरान कोई भी शुल्क नहीं कटेगा।
- औपचारिकताएं पूरी होने के बाद चुने गए कलेक्टिंग सेंटर से कार्ड लें।
हर महीने कटते हैं पांच सौ रुपये
हिमाचल प्रदेश में कांस्टेबल से लेकर इंस्पेक्टर रैंक तक करीब सोलह हजार पुलिस कर्मचारी तैनात हैं। ये कर्मचारी अपनी ड्यूटी के दौरान अक्सर निगम की बसों में सफर करते हैं। इस विशेष रियायती सफर के बदले पुलिस कर्मचारियों के मासिक वेतन से हर महीने पांच सौ रुपये काटे जाते हैं। यह सारी राशि पुलिस विभाग सीधे एचआरटीसी प्रबंधन को देता है। इसी आधार पर पुलिस कर्मियों को सुगम यात्रा मिलती है।
योजना का मुख्य उद्देश्य और पारदर्शिता
परिवहन निगम नई व्यवस्था के माध्यम से अपनी कार्यप्रणाली को बेहतर बनाना चाहता है। निगम का तर्क है कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य यात्रा सुविधा को पारदर्शी बनाना है। इससे यह सुनिश्चित हो सकेगा कि इस छूट का लाभ केवल पात्र कर्मचारियों को मिले। डिजिटल कार्ड योजना से एचआरटीसी को एकदम सटीक और स्पष्ट डेटा मिलेगा। निगम को आसानी से पता चलेगा कि रोजाना कितने पुलिस कर्मचारी मुफ्त यात्रा कर रहे हैं।


