Business News: वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बुधवार को अचानक बड़ा उछाल देखने को मिला है। पिछले कारोबारी सत्र में कीमतें सात हफ्ते के सबसे निचले स्तर पर आ गई थीं। लेकिन अमेरिकी सेना और ईरान के बीच बढ़े नए तनाव के बाद तेल के दाम फिर चढ़ गए हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट फ्यूचर्स 0.42 फीसदी की तेजी के साथ 91.83 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। इसके साथ ही यूएस वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी 0.36 फीसदी बढ़कर 88.52 डॉलर प्रति बैरल हो गया। इस तेजी से दुनिया भर के बाजारों में खलबली मच गई है।
अपाचे हेलीकॉप्टर गिराए जाने के बाद अमेरिका का हमला
होर्मुज जलडमरूमध्य के पास आधी रात को अमेरिकी अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर को मार गिराया गया था। इस बड़ी घटना के बाद अमेरिकी सेना ने ईरान के ठिकानों पर ताबड़तोड़ हवाई हमले किए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हमले के लिए सीधे तौर पर ईरान को जिम्मेदार ठहराया है।
अमेरिकी नाकेबंदी और हमलों के जवाब में तेहरान ने भी अब आर-पार की लड़ाई की कसम खा ली है। ईरान के इस कड़े रुख के बाद वाशिंगटन और तेहरान के बीच लंबे समय से चली आ रही नाजुक युद्धविराम संधि के पूरी तरह से टूटने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही रोकी
ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले ज्यादातर कमर्शियल जहाजों की आवाजाही को रोक दिया है। यह रूट वैश्विक व्यापार के लिए बेहद अहम है। दुनिया का लगभग पांचवां हिस्सा कच्चा तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) इसी रास्ते से गुजरता है।
जहाजों के रुकने से वैश्विक स्तर पर ईंधन की भारी किल्लत हो सकती है। दूसरी तरफ वाशिंगटन ने भी कड़ा कदम उठाते हुए ईरानी बंदरगाहों पर अपनी समुद्री नाकेबंदी को पूरी तरह लागू कर दिया है। इस तनाव से आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतें बेकाबू हो सकती हैं।
अमेरिका में कच्चे तेल के स्टॉक में आई भारी गिरावट
अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट के ताजा आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका में लगातार आठवें हफ्ते कच्चे तेल के स्टॉक में भारी कमी दर्ज की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक 5 जून को समाप्त हुए सप्ताह में अमेरिका का क्रूड ऑयल स्टॉक 9.12 मिलियन बैरल तक घट गया है।
इसके साथ ही वहां गैसोलीन के स्टॉक में भी 1.19 मिलियन बैरल की बड़ी गिरावट आई है। अमेरिकी बाजारों में स्टॉक कम होने का सीधा असर उनके तेल एक्सपोर्ट पर पड़ना तय है। इन्वेंट्री में आई इस भारी कमी ने भी कच्चे तेल की कीमतों को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई है।
Author: Rajesh Kumar


