Himachal News: हिमाचल प्रदेश में पूर्व भाजपा सरकार के समय कामगार कल्याण बोर्ड में बांटी गई करोड़ों की राशि पर सुक्खू सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। शासन ने अब अपात्र लोगों को पकड़ने के लिए घर-घर जाकर गहन भौतिक सत्यापन और ई-केवाईसी जांच का एक बहुत बड़ा निर्णय लिया है।
विभाग के विशेष आंकड़े बताते हैं कि अप्रैल 2021 से अक्टूबर 2022 के बीच रिकॉर्ड 70 हजार नए पंजीकरण किए गए। इन फर्जी और वास्तविक खातों में कुल 171.61 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि ट्रांसफर की गई थी। अब इस पूरे फंड वितरण का व्यापक ऑडिट किया जा रहा है।
अधिकारियों की पत्नियों ने भी उठाया योजनाओं का गलत लाभ
बोर्ड की प्राथमिक जांच में एक बहुत ही चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। दस्तावेजों की स्क्रूटनी में पता चला है कि बड़े व्यवसायियों, सरकारी कर्मचारियों, स्कूल अध्यापकों और सेना के अधिकारियों की पत्नियों तक ने खुद को फर्जी मजदूर दिखाकर मातृत्व लाभ और मकान मरम्मत की वित्तीय मदद हड़प ली।
भ्रष्टाचार की यह शुरुआत हमीरपुर, बड़सर, भोरंज और सुजानपुर से हुई थी। सरकार की नई व्यवस्था के तहत श्रम अधिकारी हफ्ते में तीन दिन दफ्तर के भीतर डिजिटल डाटा अपडेट करेंगे। इसके बाद बचे हुए तीन दिन वे ऑन ग्राउंड जाकर संदिग्ध परिवारों से सीधा पूछताछ करेंगे।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के कड़े निर्देशों के बाद अब तक 1495 अपात्र लोग सीधे तौर पर पकड़े जा चुके हैं। इनमें से 38 रसूखदार लोगों पर धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज हो चुका है। पुलिस अब बाकी बचे 953 जालसाजों के खिलाफ नई प्राथमिकी दर्ज करने की पूरी तैयारी में है।
फर्जी लाभार्थियों से ब्याज समेत होगी सरकारी पैसे की वसूली
विभाग के चेयरमैन नरदेव कंवर ने बताया कि सभी अपात्रों से ब्याज समेत पूरी रकम वापस ली जाएगी। डर के मारे पांच लोगों ने सात लाख रुपये खुद ही लौटा दिए हैं। नियमानुसार सिर्फ वही मजदूर हकदार हैं जिन्होंने मनरेगा या भवन निर्माण में साल में कम से कम 90 दिन दिहाड़ी की हो।
Author: Sunita Gupta


