Delhi News: भारतीय राजनीति में 10 जून 2026 का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज होने जा रहा है। इस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक नया कीर्तिमान स्थापित करेंगे। वह देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का सबसे लंबे समय तक चुने हुए पीएम रहने का ऐतिहासिक रिकॉर्ड तोड़ने जा रहे हैं।
आजाद भारत में पहला आम चुनाव साल 1951-52 में आयोजित हुआ था। हालांकि पंडित नेहरू साल 1947 से ही देश के प्रधानमंत्री पद पर आसीन थे। चुने हुए राष्ट्रप्रमुख के तौर पर पीएम मोदी अब उनके कार्यकाल को पीछे छोड़ देंगे। लोकतांत्रिक देश के लिए यह बेहद दिलचस्प तुलना का विषय है।
1947 का भारत: चुनौतियां और उम्मीदें
जब साल 1947 में भारत आजाद हुआ, तब देश के हालात बेहद चुनौतीपूर्ण थे। विभाजन का दर्द गहरा था और लगभग 1.4 करोड़ लोग विस्थापित हुए थे। देश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह जर्जर थी। साक्षरता दर मात्र 18 से 19 फीसदी थी और औसत आयु केवल 32 वर्ष के आसपास थी।
उस दौर में खेती पूरी तरह मानसून पर निर्भर थी और देश में अन्न की भारी कमी थी। स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचा बेहद कमजोर था। ऐसे विकट समय में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने देश की कमान संभाली। उनका मुख्य कार्य एक नए और मजबूत लोकतांत्रिक भारत की नींव रखना था।
संस्थानों का निर्माण और नेहरू का योगदान
पंडित नेहरू ने देश में लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए बेहतरीन काम किया। साल 1950 में संविधान लागू हुआ और देश को चुनाव आयोग व सुप्रीम कोर्ट जैसे मजबूत संस्थान मिले। उन्होंने वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने के लिए साल 1948 में परमाणु ऊर्जा आयोग का गठन किया।
इसके बाद साल 1951 में आईआईटी खड़गपुर और 1956 में दिल्ली एम्स की स्थापना हुई। नेहरू ने भाखड़ा-नांगल और हीराकुंड जैसे बड़े बांधों को ‘आधुनिक भारत के मंदिर’ कहा था। उनके कार्यकाल में भिलाई और राउरकेला जैसे विशाल स्टील प्लांट लगाकर देश का औद्योगिक आधार तैयार किया गया।
2026 का आत्मनिर्भर और डिजिटल इंडिया
पंडित नेहरू के दौर से निकलकर साल 2026 तक भारत की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। आज भारत 140 करोड़ से अधिक आबादी के साथ दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। आज का भारत अंतरिक्ष, तकनीक, फार्मा और डिजिटल पेमेंट के मामले में दुनिया का नेतृत्व कर रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने विकास की एक नई और तेज रफ्तार पकड़ी है। साल 2014 के बाद देश में डिजिटल गवर्नेंस और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) का मजबूत तंत्र विकसित हुआ। जन धन योजना के तहत करोड़ों बैंक खाते खोलकर वित्तीय समावेशन को बढ़ावा दिया गया।
यूपीआई और जन कल्याणकारी योजनाएं
भारत की भुगतान व्यवस्था को बदलने में यूपीआई (UPI) ने सबसे बड़ी और क्रांतिकारी भूमिका निभाई है। आज छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े व्यापारियों तक सभी डिजिटल लेनदेन कर रहे हैं। इसके साथ ही स्वच्छ भारत मिशन के तहत देश भर में 11 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण हुआ।
उज्ज्वला योजना के जरिए 10 करोड़ से अधिक परिवारों को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन दिए गए। वहीं आयुष्मान भारत योजना के तहत गरीबों को सालाना 5 लाख रुपये तक का मुफ्त स्वास्थ्य कवच मिला। पीएम किसान योजना से देश के करोड़ों किसानों को सीधी आर्थिक सहायता मिल रही है।
बुनियादी ढांचे में आई अभूतपूर्व तेजी
मोदी सरकार के कार्यकाल में देश के इंफ्रास्ट्रक्चर का कायाकल्प हुआ है। राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई बढ़कर 1.4 लाख किलोमीटर से अधिक हो गई है। देश में एयरपोर्ट की संख्या दोगुनी हो चुकी है और वंदे भारत जैसी आधुनिक ट्रेनें रेल यात्रा की नई पहचान बन चुकी हैं।
जल जीवन मिशन के माध्यम से ग्रामीण इलाकों में घरों तक शुद्ध पेयजल पहुंचाया जा रहा है। साल 2019 में जहां केवल 3 करोड़ घरों में नल कनेक्शन थे, वहीं अब यह आंकड़ा 14 करोड़ के पार पहुंच चुका है। हर गांव तक बिजली पहुंचाने का काम पूरा किया गया है।
ऐतिहासिक और कड़े नीतिगत फैसले
पीएम मोदी के दौर को कई बड़े और कड़े नीतिगत फैसलों के लिए भी याद किया जाता है। साल 2016 की नोटबंदी और 2017 में जीएसटी का लागू होना इसके बड़े उदाहरण हैं। इसके बाद साल 2019 में कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाना एक ऐतिहासिक कदम साबित हुआ।
सरकार ने तीन तलाक के खिलाफ कानून बनाया और साल 2023 में महिला आरक्षण बिल पास कराया। साल 2024 में अयोध्या में भव्य राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा हुई। इन सभी बड़े फैसलों ने देश की राजनीति, समाज और शासन व्यवस्था पर एक बहुत गहरा और दूरगामी असर डाला है।
सुरक्षा, विज्ञान और वैश्विक पटल पर भारत
वैश्विक मंच पर आज का भारत अत्यंत आक्रामक, सुरक्षित और आत्मविश्वास से भरा हुआ दिखाई देता है। भारत ने जी-20 की सफल अध्यक्षता कर दुनिया में अपनी धाक जमाई। अंतरिक्ष विज्ञान में चंद्रयान-3 ने चांद के दक्षिणी ध्रुव पर तिरंगा फहराकर नया इतिहास रच दिया।
कोरोना काल में भारत ने रिकॉर्ड 220 करोड़ से अधिक वैक्सीन डोज लगाकर अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया। रक्षा क्षेत्र में ‘मेक इन इंडिया’ के तहत हथियारों का घरेलू उत्पादन तेजी से बढ़ा है। आज भारत दुनिया के देशों को हथियार निर्यात करने की स्थिति में पहुंच गया है।
नींव और उड़ान का अनूठा संतुलन
पंडित नेहरू और पीएम मोदी के दौर की सीधी तुलना करना संभव नहीं है। नेहरू के पास एक नया, गरीब और बिखरा हुआ भारत था, जिसे संवारना था। पीएम मोदी के पास पहले से स्थापित संस्थान, बड़ा बाजार और आधुनिक तकनीक की पूरी ताकत मौजूद थी।
नेहरू ने जहां देश की मजबूत नींव रखी, वहीं मोदी ने उस पर विकास की तेज उड़ान भरी है। 1947 का भारत जहां अस्तित्व के संघर्ष में जुटा था, वहीं 2026 का भारत वैश्विक महाशक्ति बनने की आकांक्षा रखता है। दोनों ही नेताओं ने अपने-अपने समय में देश को मजबूत किया है।
Author: Gaurav Malhotra


