Lifestyle News: डिजिटल क्रांति के इस दौर में महिलाओं की लाइफस्टाइल पूरी तरह बदल गई है। कॉलेज की पढ़ाई हो, ऑफिस की मीटिंग या फिर घर की बड़ी जिम्मेदारियां, शहर की लड़कियां अब अपनी पीरियड डेट याद रखने के लिए पुराने कैलेंडर पर निर्भर नहीं हैं। मोबाइल में मौजूद स्मार्ट पीरियड ट्रैकिंग ऐप्स उनकी नई डिजिटल हेल्थ डायरी बन रहे हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इन आधुनिक ऐप्स ने महिलाओं में मासिक धर्म से जुड़े संवेदनशील विषयों पर जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पहले जिस विषय पर समाज में खुलकर चर्चा नहीं होती थी, आज की युवा पीढ़ी उस स्वास्थ्य समस्या को लेकर अधिक सजग और गंभीर नजर आ रही है।
हार्मोनल बदलावों और मासिक चक्र के पैटर्न को समझना हुआ आसान
इन ऐप्स के माध्यम से महिलाओं को अपने शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलावों को समझने में बहुत मदद मिल रही है। महिलाएं इन मोबाइल ऐप्स के जरिए अपनी पीरियड डेट, ब्लड फ्लो, बदन दर्द, मूड, स्लीप पैटर्न और अन्य जरूरी स्वास्थ्य संबंधी जानकारियां नियमित रूप से रिकॉर्ड कर रही हैं।
वरिष्ठ गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. अमृता चौरसिया के मुताबिक नियमित रिकॉर्ड रखने से शरीर की आंतरिक समस्याओं की पहचान करना आसान हो जाता है। वहीं डॉक्टर ऐमन का कहना है कि मासिक चक्र का रिकॉर्ड सुरक्षित रहने से किसी भी असामान्यता की स्थिति में समय रहते सटीक चिकित्सकीय सलाह ली जा सकती है।
वर्किंग वुमेन और छात्राओं की वर्क प्लानिंग हुई बेहद आसान
व्यस्त दिनचर्या के बीच हर महीने की तारीख याद रखना आसान नहीं होता है। कामकाजी महिलाओं और छात्राओं के मुताबिक ये ऐप्स समय पर ऑटोमैटिक नोटिफिकेशन और रिमाइंडर देकर उन्हें पहले ही सतर्क कर देते हैं। इससे ऑफिस मीटिंग्स, टूर प्लान और परीक्षा के दिनों को मैनेज करना आसान हो जाता है।
वर्किंग वुमन आयुषी और स्वाति ने बताया कि ऐप के एडवांस फीचर्स से शेड्यूल और हेल्थ दोनों संतुलित रहते हैं। वहीं पीजी में रहने वाली छात्रा कृतिका और गृहणी जया के अनुसार समय पर मिलने वाले अलर्ट से मानसिक तनाव बहुत कम हो जाता है और पूरे महीने की प्लानिंग आसान हो जाती है।
Author: Karuna Sen


