Delhi News: दिल्ली की एक विशेष अदालत ने जिनेवा स्थित भारत के स्थायी मिशन में करोड़ों रुपये की वित्तीय हेराफेरी के आरोपी पूर्व अधिकारी को नियमित जमानत दे दी है। आरोपी पर आरोप है कि उसने मिशन के सरकारी खाते से दो लाख स्विस फ्रैंक यानी करीब 2 करोड़ रुपये का गबन किया। जांच में खुलासा हुआ कि उसने सरकारी धन को अवैध रूप से ‘क्रिप्टो-गैंबलिंग’ (क्रिप्टो जुए) में निवेश किया था। इस सनसनीखेज मामले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय मिशन की सुरक्षा और पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए थे।
अदालत में हुई नियमित जमानत पर सुनवाई
विशेष न्यायाधीश विजेता सिंह रावत ने आरोपी मोहित की जमानत याचिका पर सुनवाई की। मोहित ने दिसंबर 2024 में स्विट्जरलैंड के जिनेवा में स्थित भारतीय मिशन में सहायक अनुभाग अधिकारी के रूप में जिम्मेदारी संभाली थी। अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि आरोपी ने पद का दुरुपयोग करते हुए वित्तीय रिकॉर्ड के साथ छेड़छाड़ की। उसने अनधिकृत तरीके से यूनियन बैंक ऑफ स्विट्जरलैंड (UBS) में मौजूद मिशन के खाते से बड़ी रकम निकाली और उसे निजी लाभ के लिए जुए में लगा दिया।
गवाहों की स्थिति और कानूनी दलीलें
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि इस मामले में अभियोजन पक्ष के मुख्य गवाह सरकारी कर्मचारी हैं। ये सभी गवाह पद और पदानुक्रम में आरोपी मोहित से वरिष्ठ अधिकारी हैं। अदालत ने इस तथ्य को महत्वपूर्ण माना क्योंकि वरिष्ठ अधिकारियों पर आरोपी का कोई दबाव होने की संभावना कम है। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि आरोपी जांच में पूरा सहयोग कर रहा है और उसकी हिरासत की अब और आवश्यकता नहीं है। अदालत ने इन दलीलों को गंभीरता से सुना और अपना फैसला सुनाया।
अदालत ने इन शर्तों पर दी रिहाई
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर पाया, जिससे यह साबित हो सके कि वह न्यायिक प्रक्रिया से भाग सकता है। न्यायाधीश ने कहा कि सबूतों के साथ छेड़छाड़ या गवाहों को प्रभावित करने की कोई वास्तविक आशंका फिलहाल नजर नहीं आती। इसके बाद अदालत ने मोहित को 75,000 रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि का एक जमानतदार पेश करने की शर्त पर रिहा करने का आदेश जारी कर दिया।
आरोपी अधिकारी पर लगे गंभीर आरोप
आरोपी अधिकारी पर सरकारी धन की जालसाजी और अनधिकृत निकासी के गंभीर आरोप लगे हैं। जांच रिपोर्ट के अनुसार, मोहित ने मिशन के खातों में हेरफेर किया ताकि किसी को शक न हो। उसने बैंक खातों की सुरक्षा में सेंध लगाई और धोखाधड़ी की। यह मामला तब प्रकाश में आया जब आंतरिक ऑडिट के दौरान वित्तीय विसंगतियां पाई गईं। वर्तमान में वह मिशन के सहायक अनुभाग अधिकारी के पद से हटा दिया गया है और अब उसे अदालती कार्रवाई का सामना करना होगा।


