राहुल गांधी के विदेशी दौरों पर भाजपा का महा-विस्फोट: 11 करोड़ की कमाई, 60 करोड़ का खर्च, आखिर ‘गुप्त’ यात्राओं का सच क्या है?

New Delhi News: भारतीय राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। सत्ताधारी भाजपा ने राहुल गांधी की विदेश यात्राओं पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी का सीधा आरोप है कि राहुल की घोषित आय और उनके विदेशी दौरों के खर्च में भारी अंतर है। पिछले बाईस सालों में उनकी चौवन विदेश यात्राओं पर करीब साठ करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। जबकि उनकी कुल घोषित आय सिर्फ ग्यारह करोड़ रुपये है। यह वित्तीय विवाद अब सियासी गलियारों में पूरी तरह गरमा गया है।

भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस अहम मुद्दे को उठाया। उन्होंने राहुल गांधी के पिछले बाइस वर्षों के विदेशी दौरों का पूरा हिसाब जनता के सामने रखा। पात्रा ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि साल दो हजार चार से राहुल ने चौवन निजी यात्राएं की हैं। भाजपा के ताजा विश्लेषण के मुताबिक राहुल की कुल कमाई लगभग ग्यारह करोड़ रुपये रही है। वहीं उनके इन विदेशी दौरों का कुल खर्च साठ करोड़ के विशाल आंकड़े को भी पार कर गया है।

शाही सुविधाओं और यात्रा के खर्च पर उठे कड़े सवाल

संबित पात्रा ने कांग्रेस से इन यात्राओं के वित्तीय स्रोत पर कड़े सवाल पूछे हैं। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की अधिकांश यात्राएं सार्वजनिक रूप से जानी जाती हैं। लेकिन इन महंगे दौरों के लिए इतना भारी फंड आखिर कहां से आता है। पांच सितारा होटलों में रुकना, लग्जरी गाड़ियों का उपयोग और सहायकों की फौज साथ रखना बड़ा मुद्दा है। पात्रा ने पूछा कि क्या यह सब केवल ग्यारह करोड़ की आय में किसी भी तरह से संभव हो सकता है।

सुरक्षा एजेंसियों से छिपाई गई गुप्त विदेशी यात्राओं का राज

भाजपा का यह जोरदार हमला केवल पैसों तक ही सीमित नहीं रहा। संबित पात्रा ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के कुछ कथित संदेशों का हवाला दिया। उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी ने कई बार पूरी तरह से गुप्त यात्राएं की हैं। सबसे हैरानी की बात है कि इन दौरों की जानकारी सुरक्षा एजेंसियों को भी नहीं दी गई। इसमें इस साल तीन मई को मस्कट और ओमान की एक अघोषित यात्रा का विशेष रूप से जिक्र किया गया है।

मस्कट और ओमान की इस गुप्त यात्रा पर लगभग पचास लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसके अलावा कुछ अन्य विदेशी यात्राओं पर भी गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। भाजपा नेताओं ने दिसंबर दो हजार पच्चीस में हुई राहुल की यात्राओं का भी खास जिक्र किया। इस दौरान लंदन और बर्लिन के साथ लैटिन अमेरिका की उन्नीस रातों की लंबी यात्राएं शामिल थीं। इन अज्ञात और बेहद महंगी यात्राओं ने भारतीय राजनीति में एक बिल्कुल नया विवाद खड़ा कर दिया है।

संसद से नदारद रहने और कर्तव्यों पर उठते बड़े सवाल

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहित कई दिग्गज नेताओं ने संसद में राहुल की कम उपस्थिति पर निशाना साधा। भाजपा का तर्क है कि महत्वपूर्ण विधायी सत्रों के दौरान राहुल अक्सर विदेश में ही होते हैं। यह उनके संसदीय कर्तव्यों के प्रति गंभीरता पर एक बड़ा सवालिया निशान लगाता है। यह राजनीतिक हमला उस समय और भी ज्यादा तेज हो गया है। दरअसल पीएम मोदी ने हाल ही में देशवासियों से स्वदेशी अपनाने और गैर-जरूरी खर्चों में कटौती की अपील की है।

हालांकि राहुल गांधी को इलाहाबाद हाई कोर्ट से एक बड़ी कानूनी राहत मिली है। अदालत ने उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर की याचिका को तुरंत खारिज कर दिया। लेकिन संसद के भीतर उनकी स्थिति अब भी चुनौतीपूर्ण बनी है। उनके कई बयानों को रिकॉर्ड से हटाया गया है जिसे सत्ता पक्ष मर्यादा का उल्लंघन मानता है। फिलहाल कांग्रेस पार्टी ने इन गंभीर वित्तीय आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। यह खर्च का विवाद जल्द ही एक बड़ा चुनावी मुद्दा बन सकता है।

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