ऐतिहासिक गिरावट: डॉलर के मुकाबले 96 के पार पहुंचा रुपया, अब आपकी जेब पर होगा सीधा हमला

India Business News: भारतीय मुद्रा बाजार के लिए शुक्रवार का दिन बेहद विनाशकारी साबित हुआ है। विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रुपया अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। इतिहास में यह पहली बार है जब रुपया डॉलर के मुकाबले 96 के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया। बाजार खुलते ही मची इस भगदड़ ने निवेशकों और आम जनता की रातों की नींद उड़ा दी है। वैश्विक तनाव के बीच आई इस गिरावट ने अर्थव्यवस्था के सामने गंभीर संकट खड़ा कर दिया है।

रुपये की इस ऐतिहासिक कमजोरी के पीछे अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां प्रमुख जिम्मेदार मानी जा रही हैं। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के तनाव ने वैश्विक निवेशकों को डरा दिया है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। तेल की इन बढ़ती कीमतों ने रुपये की कमर पूरी तरह तोड़ दी है। आम नागरिक के लिए यह महज एक गिरावट नहीं है। इसका सीधा मतलब आपकी रसोई और घरेलू खर्च पर होने वाला बड़ा हमला है।

आयात महंगा होने से रसोई का बजट बिगड़ा

भारत अपनी खपत का बड़ा हिस्सा दूसरे देशों से आयात करता है। हम खाद्य तेल और दालों जैसी जरूरी चीजों के लिए विदेशों पर निर्भर हैं। रुपया कमजोर होने पर हमें इन वस्तुओं की खरीद के लिए ज्यादा डॉलर देने पड़ते हैं। इसका सीधा असर आपके किचन के बजट पर पड़ने वाला है। आने वाले कुछ दिनों में रिफाइंड तेल और विभिन्न दालों की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। मध्यम वर्ग के लिए यह महंगाई का एक नया दौर शुरू करेगा।

ईंधन की कीमतों पर रुपये की गिरावट का सबसे खतरनाक असर पड़ता है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 80 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। डॉलर के मुकाबले रुपये का 96 के पार जाना आयात को बहुत महंगा बना देगा। इससे पेट्रोल और डीजल के दामों में वृद्धि होना लगभग तय है। जब डीजल महंगा होता है, तो माल ढुलाई का किराया भी बढ़ जाता है। परिवहन लागत बढ़ने से बाजार में सब्जी और फलों की कीमतें भी तेजी से बढ़ेंगी।

आरबीआई की सख्ती से बढ़ सकती है आपकी ईएमआई

रुपये की स्थिति को संभालने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक अब कड़े कदम उठा सकता है। आरबीआई को अपने विदेशी मुद्रा भंडार से डॉलर की बिक्री शुरू करनी पड़ सकती है। इसके अलावा, महंगाई पर काबू पाने के लिए बैंक ब्याज दरों या रेपो रेट में बढ़ोतरी का विकल्प चुन सकता है। यदि रिजर्व बैंक ब्याज दरें बढ़ाता है, तो बैंकों से लिया गया कर्ज महंगा हो जाएगा। इससे आपके होम लोन और कार लोन की ईएमआई में सीधा इजाफा देखने को मिलेगा।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि रुपये में जारी यह गिरावट फिलहाल थमने वाली नहीं है। कच्चे तेल के दाम और वैश्विक भू-राजनीतिक हालात रुपये की दिशा तय करेंगे। निवेशकों को अब काफी संभलकर कदम उठाने की सलाह दी जा रही है। घरेलू बाजार में आयातित इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल फोन की कीमतें भी बढ़ सकती हैं। सरकार और केंद्रीय बैंक के लिए आने वाले कुछ हफ्ते बेहद चुनौतीपूर्ण रहने वाले हैं। उन्हें मुद्रा और महंगाई के बीच संतुलन बिठाना होगा।

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