उंगली पर स्याही देख न हों परेशान, हिमाचल पंचायत चुनाव में वकीलों के वोट पर आयोग का बड़ा फैसला

Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश में आगामी पंचायत चुनाव को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग ने एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी किया है। हाल ही में हुए बार काउंसिल चुनाव के कारण कई अधिवक्ताओं की उंगली पर अमिट स्याही लगी हुई है। आयोग ने साफ किया है कि उंगली पर पहले से स्याही होने के बावजूद वकीलों को मतदान से वंचित नहीं किया जाएगा। भ्रम की स्थिति को देखते हुए निर्वाचन अधिकारियों को इस संबंध में सख्त निर्देश भेज दिए गए हैं।

राज्य निर्वाचन आयोग के संज्ञान में आया था कि बार काउंसिल चुनाव में मतदान करने वाले अधिवक्ताओं की बाएं हाथ की तर्जनी उंगली पर निशान मौजूद है। आयोग ने आधिकारिक बयान में कहा कि केवल इस आधार पर किसी भी योग्य मतदाता को वोट डालने से नहीं रोका जा सकता। इस फैसले से राज्य के हजारों अधिवक्ताओं को बड़ी राहत मिली है। प्रशासन अब उनकी पहचान की पुष्टि के लिए वैकल्पिक दस्तावेजों का सहारा लेगा।

अधिवक्ताओं के लिए पहचान पत्र दिखाना होगा अनिवार्य

आयोग के अनुसार जिन वकीलों की उंगली पर पहले से स्याही लगी है, उन्हें मतदान केंद्र पर अपना अधिवक्ता परिचय पत्र दिखाना होगा। इसके अलावा वे बार काउंसिल द्वारा जारी पहचान पत्र भी दिखा सकते हैं। मतदान केंद्र पर मौजूद कर्मचारी इन दस्तावेजों के आधार पर मतदाता की पहचान पुख्ता करेंगे। पहचान सुनिश्चित होने के बाद ही उन्हें बैलेट पेपर या ईवीएम तक जाने की अनुमति दी जाएगी। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए आयोग ने नई प्रक्रिया तय की है।

पहचान पुख्ता होने के बाद मतदान प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। इस बार अधिवक्ताओं के दाहिने हाथ की तर्जनी उंगली पर अमिट स्याही लगाई जाएगी। आमतौर पर स्याही बाएं हाथ पर लगाई जाती है, लेकिन विशेष परिस्थितियों में यह बदलाव किया गया है। आयोग का मानना है कि इससे रिकॉर्ड बना रहेगा और पारदर्शिता भी सुनिश्चित होगी। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि चुनाव प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो।

निर्वाचन अधिकारियों को जारी हुए सख्त निर्देश

राज्य निर्वाचन आयोग ने सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों और खंड विकास अधिकारियों को इस संबंध में सर्कुलर जारी कर दिया है। मतदान केंद्रों पर तैनात पोलिंग पार्टियों को अधिवक्ताओं के साथ सहयोग करने के निर्देश दिए गए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि कोई भी मतदाता अपने मताधिकार से वंचित नहीं रहना चाहिए। निर्वाचन प्रक्रिया को निष्पक्ष और सुचारू बनाने के लिए फील्ड अधिकारियों को पूरी सतर्कता बरतने को कहा गया है।

हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव का बिगुल बज चुका है। राज्य में मतदान तीन चरणों में 26, 28 और 30 मई को आयोजित किया जाएगा। आयोग का मुख्य लक्ष्य शत-प्रतिशत मतदान और निष्पक्ष चुनाव संपन्न कराना है। इस विशेष व्यवस्था से अधिवक्ताओं को अपने लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग करने में आसानी होगी। चुनाव के दौरान सुरक्षा और पारदर्शिता के लिए प्रशासन ने सभी पुख्ता इंतजाम पहले ही पूरे कर लिए हैं।

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