बंगाल चुनाव 2026: क्या ‘दीदी’ का किला ढहा रही BJP? रिकॉर्ड वोटिंग के बाद फलोदी सट्टा बाजार ने उड़ाई नींद

West Bengal News: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बीच सियासी उलटफेर की सुगबुगाहट तेज हो गई है। बंपर मतदान के बाद सट्टा बाजारों ने राजनीतिक पंडितों की नींद उड़ा दी है। फलोदी, दिल्ली और कोलकाता सट्टा बाजार के ताजा अनुमान ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी बजा रहे हैं। इन अनौपचारिक अनुमानों में भारतीय जनता पार्टी बहुमत हासिल करती दिख रही है। अब पूरे देश की निगाहें 4 मई को आने वाले असल चुनावी नतीजों पर टिक गई हैं।

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बंपर वोटिंग से मिले सत्ता विरोधी लहर के बड़े संकेत

बंगाल चुनाव के पहले चरण ने एक नया ऐतिहासिक रिकॉर्ड कायम किया है। कुल 152 सीटों पर 92.88 प्रतिशत बंपर मतदान दर्ज किया गया है। वहीं दूसरे चरण में भी दोपहर तीन बजे तक 78.68 प्रतिशत वोट पड़े हैं। साल 2021 के विधानसभा चुनाव में कुल मतदान 82.3 प्रतिशत रहा था। राजनीतिक विशेषज्ञ इस अभूतपूर्व उछाल को सत्ता विरोधी लहर मान रहे हैं। यह भारी मतदान राज्य में बड़े राजनीतिक परिवर्तन का साफ इशारा कर रहा है।

सट्टा बाजारों में टीएमसी पिछड़ी और भाजपा को भारी बढ़त

देश के प्रमुख सट्टा बाजारों के रुझान तृणमूल कांग्रेस के लिए चिंताजनक हैं। फलोदी सट्टा बाजार के अनुसार भाजपा 170 और टीएमसी 120 सीटें जीत सकती है। दिल्ली सट्टा बाजार ने भाजपा को 180 और टीएमसी को 110 सीटें दी हैं। कोलकाता सट्टा बाजार भाजपा के लिए 190 और टीएमसी के लिए 100 सीटों की भविष्यवाणी कर रहा है। हालांकि एक शुरुआती अनुमान में दोनों दलों के बीच 148 से 151 सीटों का करीबी मुकाबला बताया गया था।

साल 2021 के मुकाबले पूरी तरह बदल गया जमीनी माहौल

साल 2021 के चुनाव में ममता बनर्जी ने 216 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत पाया था। तब भाजपा केवल 77 सीटों पर सिमट गई थी। दोनों पार्टियों के बीच फासला 130 सीटों से अधिक था। लेकिन मौजूदा रुझान बता रहे हैं कि इस बार जमीनी माहौल बदल चुका है। सट्टा बाजार के अनुसार अब हार-जीत का अंतर बेहद कम रहने वाला है। कांग्रेस और वामपंथी गठबंधन इस बार भी चुनावी मुकाबले में पूरी तरह हाशिए पर नजर आ रहे हैं।

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फलोदी का नेटवर्क और चार मई के असल नतीजों का इंतजार

राजस्थान के जोधपुर का फलोदी सट्टा बाजार अपने सटीक राजनीतिक अनुमानों के लिए प्रसिद्ध है। यह बाजार स्थानीय नेटवर्कों और समाचार रिपोर्ट्स से जानकारी जुटाता है। सट्टेबाज जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को समझकर दांव तय करते हैं। जीतने की कम संभावना वाली पार्टी का भाव ज्यादा रखा जाता है। हालांकि सट्टेबाजी भारत में गैर-कानूनी है। फिर भी इन डरावने आंकड़ों ने टीएमसी की धड़कनें बढ़ा दी हैं। अब पूरे देश को चार मई के आधिकारिक नतीजों का बेसब्री से इंतजार है।

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