ब्रिटेन के कैम्ब्रिजशायर में पहला हिंदू मंदिर बनाने की कोशिशों को झटका, काउंसिल ने चर्च और मुस्लिम ग्रुप को दी जमीन

London News: ब्रिटेन के कैम्ब्रिजशायर में रहने वाले प्रवासी भारतीय और ब्रिटिश हिंदुओं की धार्मिक कोशिशों को बड़ा झटका लगा है। काउंटी में अपनी पहली स्थाई पूजा-स्थली बनाने का उनका सपना अधूरा रह गया। स्थानीय प्रशासनिक काउंसिल ने नॉर्थस्टो शहर की सरकारी जमीन एक हिंदू चैरिटी के बजाय चर्च और मुस्लिम समूह को आवंटित कर दी है।

- Advertisement -

काउंसिल की अंक प्रणाली में पिछड़ गया हिंदू समाज का प्रस्ताव

साउथ कैम्ब्रिजशायर डिस्ट्रिक्ट काउंसिल ने नॉर्थस्टो चर्च नेटवर्क को 999 साल की लंबी अवधि के लिए 0.2 हेक्टेयर जमीन बहुत ही मामूली किराए पर लीज पर दे दी है। इस जमीन को हासिल करने के लिए हिंदू समाज नॉर्थस्टो संस्था ने भी आधिकारिक तौर पर अपनी बड़ी बोली लगाई थी।

हिंदू समाज ने वहां एक भव्य मंदिर के साथ सर्वधर्म केंद्र और वेलबीइंग सेंटर बनाने का बेहतरीन प्रस्ताव दिया था। हालांकि काउंसिल अधिकारियों की अंक प्रणाली में हिंदू संस्था को 65 प्रतिशत अंक मिले। वहीं चर्च नेटवर्क की बोली को 81 प्रतिशत अंक मिलने के कारण जमीन उन्हें सौंप दी गई।

चर्च नेटवर्क के नए प्रस्ताव में नॉर्थस्टो के मुस्लिम समुदाय को एक मुख्य किराएदार के रूप में शामिल किया गया है। इसके तहत वहां मुसलमानों के लिए एक अलग इस्लामिक प्रार्थना कक्ष और शिक्षा केंद्र का निर्माण किया जाएगा। इस फैसले से स्थानीय हिंदू नागरिकों में काफी मायूसी देखी जा रही है।

- Advertisement -

कैम्ब्रिजशायर में एक भी मंदिर नहीं, गैरेज में रखी जा रही मूर्तियां

चिंता की बात यह है कि पूरे कैम्ब्रिजशायर में कई चर्च और मस्जिदें सक्रिय हैं, लेकिन वहां हिंदुओं के लिए एक भी मंदिर नहीं है। नियमित पूजा-अर्चना और त्योहारों के लिए स्थानीय हिंदुओं को बर्मिंघम या वेम्बली तक दो घंटे का लंबा और थकाऊ सफर तय करना पड़ता है।

सामुदायिक भवनों को तुरंत किराए पर न मिलने से हिंदुओं के लिए अपने पावन त्योहार मनाना बहुत मुश्किल हो जाता है। वर्तमान में वे अपनी पवित्र मूर्तियों को कैरी बैग में भरकर गैरेज में रखने को मजबूर हैं। स्थानांतरण के दौरान कई बहुमूल्य मूर्तियां क्षतिग्रस्त भी हो जाती हैं।

प्रक्रिया की पारदर्शिता पर उठे सवाल, फैसले के खिलाफ अपील की तैयारी

हिंदू संस्था की चेयरपर्सन अपर्णा निगम-सक्सेना ने काउंसिल के इस भेदभावपूर्ण फैसले पर अपनी गहरी निराशा व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि प्रशासन की इस पूरी चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता और मजबूती को लेकर हमारे मन में कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि संस्था इस फैसले के खिलाफ कानूनी अपील करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। फाइनेंशियल ट्रैक रिकॉर्ड की कमी के कारण उनकी बोली को कम आंका गया। काउंसिल ने इस महत्वपूर्ण शर्त को लेकर संस्था को पहले कोई स्पष्ट गाइडलाइंस भी जारी नहीं की थीं।

- Advertisement -

बड़ी खबरें

Topics

Related Articles