कुल्लू के देव सदन में सात जुलाई को मनेगी प्रख्यात साहित्यकार पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी की राज्य स्तरीय जयंती

Kullu News: भाषा एवं संस्कृति विभाग, हिमाचल प्रदेश द्वारा प्रदेश के प्रख्यात साहित्यकार पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी की राज्य स्तरीय जयंती का भव्य आयोजन किया जाएगा। आगामी 7 जुलाई को कुल्लू के ढालपुर स्थित देव सदन में यह गरिमामयी समारोह आयोजित होगा। इसमें सूबे के कई नामचीन दिग्गज लेखक शिरकत करेंगे।

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दो सत्रों में आयोजित होंगे बौद्धिक संवाद और सांस्कृतिक कार्यक्रम

इस राज्य स्तरीय साहित्यिक समारोह के प्रथम सत्र में सुबह ठीक दस बजे लेखक गोष्ठी का शुभारंभ होगा। इसके बाद आयोजित होने वाले द्वितीय सत्र में कला प्रेमियों के लिए एक विशेष नाटक और भव्य कवि सम्मेलन का शानदार आयोजन किया जाएगा। विभाग ने कार्यक्रम को लेकर सभी जरूरी तैयारियां पूरी कर ली हैं।

प्रथम सत्र की लेखक गोष्ठी के दौरान मुख्य वक्ता डॉ. दयानंद गौतम अपना विशेष शोधपत्र प्रस्तुत करेंगे। उनके इस पत्र का मुख्य विषय ‘पं. चंद्रधर शर्मा गुलेरी: निबंधकार एवं व्यंग्यकार’ रहेगा। इसके उपरांत हिमाचल प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए प्रबुद्ध साहित्यकार इस गंभीर विषय पर विस्तृत परिचर्चा करेंगे।

स्कूली और कॉलेज के विद्यार्थियों को मिलेगा संवाद का बेहतरीन अवसर

संस्कृति विभाग ने हिंदी विषय और साहित्य में गहरी रुचि रखने वाले स्थानीय स्कूलों तथा कॉलेजों के विद्यार्थियों को भी इस समारोह में विशेष रूप से आमंत्रित किया है। इस परिचर्चा के समापन पर युवाओं को आमंत्रित साहित्यकारों के साथ सीधे संवाद करने का एक बेहतरीन मौका मिलेगा।

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समारोह के दूसरे सत्र में आयोजित होने वाले कवि सम्मेलन के दौरान भी युवा छात्रों को लाभ होगा। उन्हें प्रदेशभर से आए नामी कवियों के साथ आधुनिक साहित्य और समकालीन कविता से जुड़े विभिन्न रचनात्मक विषयों पर खुलकर विचार-विमर्श करने का शानदार अवसर प्राप्त होगा। इससे उनकी साहित्यिक समझ विकसित होगी।

बहुआयामी प्रतिभा के धनी थे प्रकांड विद्वान पंडित गुलेरी

भाषा एवं संस्कृति विभाग की निदेशक रीमा कश्यप ने पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी के योगदान को याद किया। उन्होंने बताया कि पंडित गुलेरी बहुआयामी प्रतिभा के धनी थे। वे एक उत्कृष्ट कहानीकार होने के साथ-साथ श्रेष्ठ निबंधकार, भाषाशास्त्री, प्रखर कवि, कुशल संपादक तथा भारतीय संस्कृति के प्रकांड विद्वान थे।

दिवंगत गुलेरी का प्राकृत भाषा, बौद्ध दर्शन और भाषा विज्ञान पर बहुत ही गहन अध्ययन था। उनका प्रसिद्ध संस्मरणात्मक निबंध ‘सुमिरिनी के मनके’ वर्तमान में हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के शैक्षणिक पाठ्यक्रम का भी हिस्सा है। नई पीढ़ी के बच्चे उनकी रचनाओं से जीवन के मूल्य सीख रहे हैं।

दुर्लभ ऐतिहासिक अभिलेखों की लगेगी प्रदर्शनी, चालीस साहित्यकार होंगे शामिल

निदेशक ने जानकारी दी कि इस प्रतिष्ठित राज्य स्तरीय आयोजन में हिमाचल प्रदेश के विभिन्न जिलों से लगभग 40 जाने-माने कवि एवं साहित्यकार भाग ले रहे हैं। इसके साथ ही समारोह स्थल पर राज्य अभिलेखागार द्वारा ऐतिहासिक एवं अत्यंत दुर्लभ सरकारी तथा निजी अभिलेखों की एक विशेष प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी।

इस ज्ञानवर्धक प्रदर्शनी का लाभ निकटवर्ती विद्यालयों एवं महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं सहित आम जनता भी आसानी से उठा सकेगी। विभाग इस तरह के आयोजनों के माध्यम से राज्य की समृद्ध साहित्यिक धरोहर को संजोने और उसे युवा पीढ़ी तक पहुंचाने का निरंतर सराहनीय प्रयास कर रहा है।

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