New Delhi News: भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने देश की आंतरिक सुरक्षा को लेकर एक बहुत बड़ा और सख्त कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम के तहत पाकिस्तान की धरती पर सक्रिय 23 खूंखार अपराधियों को आधिकारिक तौर पर आतंकवादी घोषित कर दिया है।
प्रतिबंधित संगठनों के वित्तीय और जमीनी नेटवर्क पर सीधी चोट
ये सभी खतरनाक अपराधी जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे कई अन्य प्रतिबंधित संगठनों से सीधे जुड़े हुए हैं। गृह मंत्रालय द्वारा इस नई सूची के जारी होने के बाद अब भारत में यूएपीए के तहत नामित कुल व्यक्तिगत आतंकवादियों की संख्या बढ़कर 80 तक पहुंच गई है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मंत्रालय की इस नई सूची ने सीमा पार से भारत के खिलाफ बड़ी साजिश रचने वाले मास्टरमाइंड्स के सबसे करीबी मददगारों को निशाना बनाया है। इसमें जैश प्रमुख मौलाना मसूद अजहर और लश्कर सरगना हाफिज सईद के शीर्ष कमांडरों के नाम शामिल हैं।
हाफिज सईद का सबसे वफादार गुर्गा अब्दुल रऊफ भी नपा
गृह मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक गजट नोटिफिकेशन के अनुसार इस सूची में लश्कर प्रमुख हाफिज सईद का सबसे भरोसेमंद सहयोगी अब्दुल रऊफ भी शामिल है। सरकारी आदेश के मुताबिक लाहौर निवासी इस अपराधी को यूएपीए कानून की चौथी अनुसूची में क्रम संख्या 69 पर दर्ज किया गया है।
आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार अब्दुल रऊफ उर्फ हाफिज अब्दुल रऊफ सीधे तौर पर जमात-उद-दावा जैसे कई हिंसक संगठनों का संचालन करता है। वह भारत में बड़े आत्मघाती हमलों की योजना बनाने, नए लड़कों की भर्ती करने और टेरर फंडिंग में मुख्य रूप से शामिल रहा है।
शून्य सहनशीलता नीति के तहत वित्तीय नेटवर्क को करेंगे ध्वस्त
गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यूएपीए अधिनियम, 1967 की धारा 35 सरकार को यह विशेष शक्ति देती है। इसके तहत यदि जांच एजेंसियों को किसी व्यक्ति के आतंकवाद में संलिप्त होने का पुख्ता विश्वास हो, तो वह उसे वैश्विक आतंकवादी घोषित कर सकती है।
पाकिस्तान की धरती का इस्तेमाल कर भारत के खिलाफ छद्म युद्ध छेड़ने वाले अपराधियों के खिलाफ यह मोदी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का हिस्सा है। इस कड़े कदम से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान पर दबाव बढ़ेगा और इन आतंकियों का वित्तीय नेटवर्क ध्वस्त हो जाएगा।

