हद से ज्यादा जिम जाना पड़ सकता है भारी, कहीं आप भी तो नहीं कर रहे अपनी फर्टिलिटी के साथ खिलवाड़?

Health: आजकल लोगों में फिटनेस को लेकर क्रेज बहुत तेजी से बढ़ा है। मैराथन, क्रॉसफिट और घंटों तक जिम में कठिन वर्कआउट करना लाइफस्टाइल का हिस्सा बन चुका है। हालांकि सेहत के लिए कड़ा व्यायाम अच्छा है, लेकिन जरूरत से ज्यादा ट्रेनिंग फर्टिलिटी को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है।

चंडीगढ़ क्लाउडनाइन अस्पताल की फर्टिलिटी एक्सपर्ट डॉक्टर कांची खुराना के अनुसार, जब ट्रेनिंग शरीर की सहनशक्ति से अधिक हो जाती है, तो यह महिला और पुरुष दोनों की प्रजनन क्षमता को नुकसान पहुंचाती है। फिट रहने के चक्कर में लोग अक्सर इस बड़े खतरे को नजरअंदाज कर देते हैं।

महिलाओं के मासिक धर्म और ओव्यूलेशन पर पड़ता है बुरा असर

महिलाओं में अत्यधिक हैवी व्यायाम करने से शरीर में ऊर्जा की भारी कमी हो सकती है। जब शरीर को जरूरत के मुताबिक जरूरी कैलोरी नहीं मिलती है, तो वह प्रजनन से जुड़े महत्वपूर्ण हार्मोनों का उत्पादन काफी कम कर देता है। इससे मासिक धर्म का चक्र पूरी तरह बिगड़ जाता है।

इस स्थिति को अमेनोरिया कहा जाता है, जिसमें पीरियड्स अनियमित हो जाते हैं या पूरी तरह बंद हो जाते हैं। इसका सीधा असर अंडोत्सर्जन यानी ओव्यूलेशन प्रक्रिया पर पड़ता है। ओव्यूलेशन प्रभावित होने के कारण महिलाओं को गर्भधारण करने में बहुत बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।

पुरुषों के टेस्टोस्टेरोन लेवल और शुक्राणुओं की क्वालिटी में आती है कमी

सिर्फ महिलाएं ही नहीं, बल्कि पुरुषों में भी लगातार कठिन ट्रेनिंग करने से टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का स्तर तेजी से घट सकता है। इस जरूरी हार्मोन की कमी से शुक्राणुओं की कुल संख्या, उनकी गुणवत्ता और गतिशीलता पर बहुत ही नकारात्मक और सीधा असर पड़ता है।

लंबे समय तक अत्यधिक सहनशक्ति वाले खेल जैसे अल्ट्रा-मैराथन या रोजाना भारी साइक्लिंग करने से पुरुषों में प्रजनन क्षमता अस्थायी रूप से प्रभावित हो सकती है। अत्यधिक थकान और शारीरिक तनाव के कारण पुरुषों की फर्टिलिटी पावर बहुत ही कम समय में कमजोर होने लगती है।

फर्टिलिटी से जुड़े इन 4 बड़े मिथकों की असली सच्चाई जानें

पहला मिथक है कि जितना अधिक कठिन व्यायाम करेंगे, फर्टिलिटी उतनी ही बेहतर होगी। जबकि सच यह है कि केवल संतुलित व्यायाम ही फायदेमंद होता है। दूसरा मिथक है कि ओवरट्रेनिंग से सिर्फ महिलाओं को दिक्कत होती है, पर सच में पुरुषों के शुक्राणु भी प्रभावित होते हैं।

तीसरा मिथक है कि पेशेवर एथलीटों को कभी बांझपन नहीं होता। सच यह है कि पोषण की कमी से उन्हें भी यह समस्या हो सकती है। चौथा मिथक है कि फिट दिखने वाला शरीर हमेशा फर्टाइल होता है। सच यह है कि बाहरी रूप से फिट व्यक्ति भी हार्मोनल असंतुलन से जूझ सकता है।

प्रजनन क्षमता को हमेशा मजबूत और बेहतर रखने के आसान उपाय

फर्टिलिटी को बेहतर बनाए रखने के लिए हफ्ते में केवल एक सौ पचास से तीन सौ मिनट ही मध्यम तीव्रता वाली एक्सरसाइज करें। अपने शरीर की मांग के अनुसार पर्याप्त कैलोरी और सही पोषण लें। अपने दैनिक आहार में प्रोटीन, आयरन, फोलिक एसिड और जिंक जरूर शामिल करें।

इसके अलावा रोजाना सात से नौ घंटे की भरपूर नींद लें। मानसिक तनाव को नियंत्रित करने के लिए नियमित योग और ध्यान का सहारा लें। धूम्रपान और शराब के सेवन से पूरी तरह दूरी बनाएं। समस्या होने पर तुरंत किसी योग्य फर्टिलिटी विशेषज्ञ से सलाह लें।

Asha Thakur

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