New Delhi: भारत में ओवेरियन कैंसर महिलाओं के बीच तीसरा सबसे सामान्य कैंसर बन चुका है। चिंताजनक तथ्य यह है कि 70 से 80 प्रतिशत मामलों में यह बीमारी एडवांस स्टेज में पकड़ी जाती है। इसके शुरुआती लक्षण इतने सामान्य होते हैं कि महिलाएं उन्हें अक्सर गैस या डाइजेशन की समस्या समझकर नजरअंदाज कर देती हैं, जो आगे चलकर जानलेवा साबित होता है।
ऑन्कोलॉजिस्ट इसे अक्सर ‘साइलेंट किलर’ कहते हैं, लेकिन यह बीमारी पूरी तरह खामोश नहीं होती। डॉक्टर संपदा देसाई के अनुसार, शरीर शुरुआती संकेत जरूर देता है। जल्दी पेट भर जाना, लगातार पेट फूलना और पाचन संबंधी दिक्कतें इसके शुरुआती संकेत हो सकते हैं। समस्या तब होती है जब महिलाएं इसे हार्मोनल बदलाव मानकर टाल देती हैं और देरी हो जाती है।
इन लक्षणों को बिल्कुल न करें नजरअंदाज
डॉक्टर शोना नाग बताती हैं कि लगातार पेट फूलना सबसे आम चेतावनी है। कई मरीज बताते हैं कि कम खाना खाने के बाद भी अत्यधिक भरा हुआ महसूस होता है। यदि इसके साथ पेट के निचले हिस्से या पेल्विक एरिया में दर्द बार-बार बना रहे, तो इसे हल्के में न लें और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
पीरियड्स में असामान्य बदलाव भी बीमारी का संकेत हो सकते हैं। बहुत ज्यादा ब्लीडिंग, अनियमित पीरियड्स या मेनोपॉज के बाद ब्लीडिंग होना गंभीर है। इसके अलावा, बदबूदार या असामान्य वेजाइनल डिस्चार्ज को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। हार्मोनल बदलाव आम हो सकते हैं, लेकिन लंबे समय तक चलने वाली अनियमितताओं के लिए चिकित्सकीय जांच की सख्त जरूरत होती है।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि कोई भी लक्षण दो सप्ताह से अधिक समय तक बना रहे, तो देरी न करें। जिन महिलाओं के परिवार में ब्रेस्ट, ओवेरियन या कोलन कैंसर की हिस्ट्री रही है, उन्हें अधिक सतर्क रहना चाहिए। उनमें जेनेटिक जोखिम ज्यादा होता है, इसलिए उन्हें नियमित अंतराल पर डॉक्टर से परामर्श लेते रहना चाहिए।
ओवेरियन कैंसर के लिए सर्वाइकल या ब्रेस्ट कैंसर जैसी कोई नियमित स्क्रीनिंग टेस्ट फिलहाल उपलब्ध नहीं है। इसलिए जागरूकता ही बचाव का सबसे बड़ा हथियार है। अपने शरीर में होने वाले किसी भी बदलाव को पहचानें और समय पर विशेषज्ञों से जांच कराएं। सही समय पर लिया गया निर्णय इस बीमारी को मात देने में मददगार हो सकता है।
Author: Asha Thakur


