Rajasthan News: राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में सिजेरियन ऑपरेशन के बाद प्रसूताओं की किडनी खराब होने का खौफनाक सिलसिला थम नहीं रहा है। पिछले महीने कोटा के दो अस्पतालों में प्रसव के बाद आठ महिलाओं की किडनी खराब हुई थी। इलाज के दौरान इनमें से पांच प्रसूताओं की दर्दनाक मौत हो चुकी है।
बीकानेर में भी गहराया मौत का साया
अब जून महीने में बीकानेर के पीबीएम अस्पताल से भी ऐसा ही दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। यहां भी लापरवाही के चलते अब तक छह प्रसूताओं की मौत हो चुकी है। शनिवार को एक और प्रसूता की किडनी खराब होने के बाद उसे गंभीर हालत में आईसीयू में भर्ती कराया गया है।
पीड़ित महिला का प्रसव बीते आठ जून को हुआ था। प्रसूता के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि ऑपरेशन के बाद महिला की आंखों की रोशनी भी चली गई है। हालांकि अस्पताल प्रशासन अभी इस बात को पूरी तरह स्वीकार नहीं कर रहा है।
अस्पताल प्रशासन की तरफ से आई सफाई
पीबीएम अस्पताल के कार्यवाहक अधीक्षक डॉ. परमेंद्र सिरोही ने बताया कि महिला अभी पूरी तरह अचेत है। ऐसी गंभीर स्थिति में यह कहना बहुत मुश्किल है कि उसे दिखाई दे रहा है या नहीं। डॉक्टर सिरोही ने कहा कि प्रसूताओं की किडनी खराब होने के असली कारणों की बारीकी से जांच की जा रही है।
कोटा मामले में राजस्थान के चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के निर्देश पर जांच कमेटी गठित की गई थी। इस उच्च स्तरीय कमेटी की रिपोर्ट में बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार प्रसव के बाद हैवी ब्लीडिंग रोकने वाले ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन में दवा की जगह सिर्फ पानी भरा हुआ था।
स्थानीय स्तर पर खरीदा गया था नकली इंजेक्शन
अस्पताल के डॉक्टरों ने अनजाने में प्रसूताओं को यही नकली और मिलावटी इंजेक्शन लगा दिया था। इस वजह से महिलाओं का रक्तस्राव नहीं रुका और मल्टी ऑर्गन फेलियर के कारण उनकी मौत हो गई। यह जानलेवा नकली इंजेक्शन अस्पताल प्रबंधन ने कोटा में स्थानीय स्तर पर ही खरीदा था।
Author: Manish Rathore


