Uttar Pradesh News: देश को टीबी मुक्त बनाने के सरकारी दावों के बीच यूपी के एक जिले से चौंकाने वाली रिपोर्ट आई है। स्वास्थ्य विभाग के नए आंकड़ों के अनुसार, तमाम वित्तीय प्रयासों के बावजूद संक्रमण की कड़ी नहीं टूट पाई है। वर्तमान में जिले के भीतर कुल 1881 सक्रिय टीबी मरीज उपचाराधीन हैं।
इस लचर प्रदर्शन के कारण जिला प्रदेश की स्वास्थ्य रैंकिंग में पिछड़कर अब सीधे 12वें स्थान पर पहुंच गया है। स्वास्थ्य विभाग की जनवरी से मई 2026 तक की रिपोर्ट काफी डराने वाली है। इसमें 1749 अति गंभीर श्रेणी के मरीज हैं, जबकि 132 सामान्य लक्षण वाले पीड़ित शामिल हैं।
ड्रग रेजिस्टेंट टीबी के मामले सबसे बड़ी चुनौती बने
वरिष्ठ चिकित्सकों के अनुसार, जिले में ड्रग रेजिस्टेंट टीबी के मरीज सबसे बड़ी मुसीबत साबित हो रहे हैं। इन विशेष मामलों में इलाज की पूरी प्रक्रिया बहुत लंबी, महंगी और बेहद जटिल हो जाती है। ऐसे मरीजों का मिलना साफ दर्शाता है कि स्थानीय स्तर पर संक्रमण का खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है।
मरीजों को पौष्टिक आहार देने के लिए निक्षय पोषण योजना के तहत 83.08 लाख रुपये सीधे बैंक खातों में भेजे गए हैं। इसी तरह निक्षय मित्र अभियान के अंतर्गत 1862 मरीजों को सामाजिक देखरेख के लिए गोद लिया गया है। इसके लिए करीब 1711 मददगार मित्रों का पूरा डेटा आधिकारिक पोर्टल पर दर्ज है।
ग्रामीण इलाकों में तीन चौथाई पंचायतें लक्ष्य से दूर
तमाम योजनाओं के बाद भी ग्रामीण क्षेत्रों में नए मरीजों की संख्या में कोई बड़ी गिरावट देखने को नहीं मिल रही है। जिले की कुल 451 ग्राम पंचायतों में से महज 132 पंचायतें ही अब तक पूरी तरह टीबी मुक्त हो सकी हैं। यानी तीन चौथाई ग्रामीण इलाके अभी लक्ष्य से दूर हैं।
इस विफलता से गांवों में स्वास्थ्य स्क्रीनिंग, समय पर जांच और कांटेक्ट ट्रेसिंग की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि अब तक 3642 मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो चुके हैं। प्रशासन अब घर-घर जाकर संदिग्ध मरीजों की पहचान के लिए विशेष अभियान चलाने की तैयारी कर रहा है।
Author: Asha Thakur


