जेपी नड्डा के शिमला दौरे से मची राजनीतिक हलचल, जयराम ठाकुर को लेकर दिए बड़े संकेत से चौंका हर कोई

Himachal Pradesh News: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के दो दिवसीय शिमला दौरे ने पहाड़ी राज्य की सियासत में नया सस्पेंस पैदा कर दिया है। ओपीएस यानी ओल्ड पेंशन स्कीम के संवेदनशील मुद्दे पर नड्डा ने पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को बड़ी जिम्मेदारी सौंप दी है। इस फैसले के बाद राज्य के राजनीतिक गलियारों में कयासों का दौर शुरू हो गया है।

ओपीएस मुद्दे पर जयराम ठाकुर को मिली बड़ी कमान

नड्डा ने सार्वजनिक रूप से कहा कि ओपीएस के भविष्य पर अब जयराम ठाकुर और उनकी टीम ही अंतिम निर्णय लेगी। भाजपा के इस दांव को सीधे तौर पर जयराम ठाकुर के राजनीतिक कद को बढ़ाने वाले फैसले के रूप में देखा जा रहा है। इस बयान ने विपक्षी दलों के खेमे में भी खलबली मचा दी है।

पार्टी के भीतर अगले विधानसभा चुनाव के लिए मुख्यमंत्री पद के चेहरे को लेकर लंबे समय से खींचतान चल रही थी। जयराम ठाकुर वर्तमान में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभा रहे हैं। नड्डा के इस ताजा बयान के बाद संगठन और विधायकों के बीच उनकी पकड़ पहले से कहीं ज्यादा मजबूत और असरदार हो गई है।

केंद्रीय नेतृत्व के फैसले से एक गुट में भारी उत्साह

नड्डा की इस बड़ी टिप्पणी के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं का एक वर्ग पूरी तरह उत्साह से भर गया है। जयराम ठाकुर के समर्थक इसे आलाकमान का सीधा आशीर्वाद मान रहे हैं। वहीं मुख्यमंत्री पद की रेस में शामिल अन्य बड़े नेताओं के खेमे में इस बयान से थोड़ी बेचैनी और असहजता साफ देखी जा सकती है।

हालांकि भाजपा में हमेशा मुख्यमंत्री का अंतिम चयन संसदीय बोर्ड ही करता है, लेकिन चुनावी साल से पहले ऐसे बयानों के गहरे सियासी मायने होते हैं। नड्डा के इस मास्टरस्ट्रोक ने 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी के मुख्य चेहरे की बहस को एक नया और दिलचस्प मोड़ दे दिया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नड्डा ने एक तीर से कई निशाने साधे हैं। उन्होंने ओपीएस जैसे मुश्किल मुद्दे पर स्थानीय लीडरशिप को आगे कर दिया है। अब इस बयान की गूंज और इसके सियासी नफा-नुकसान की चर्चा आगामी चुनाव तक हिमाचल प्रदेश की राजनीति के केंद्र में बनी रहेगी।

Reported By: Sunita Gupta

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