Delhi News: दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के डॉक्टरों ने चिकित्सा जगत में एक नया इतिहास रच दिया है। बाल लिवर प्रत्यारोपण (पीडियाट्रिक लिवर ट्रांसप्लांट) में भारत की वैश्विक विशेषज्ञता का लोहा मनवाते हुए डॉक्टरों ने त्रिनिदाद और टोबैगो से आए महज सात महीने के एक मासूम बच्चे का सफल लिवर प्रत्यारोपण किया है।
इस अत्यंत जटिल और चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन के समय मासूम एरिक रामसूक का वजन केवल चार किलोग्राम से भी कम था। वह एक बेहद दुर्लभ आनुवंशिक लिवर रोग की वजह से अपनी जिंदगी और मौत के बीच गंभीर संघर्ष कर रहा था। दिल्ली के डॉक्टरों ने अपनी सूझबूझ से उसे एक नया जीवन दिया है।
175 साल पुराना है भारत से खास कनेक्शन
अस्पताल प्रशासन से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार मासूम एरिक के परिवार की ऐतिहासिक जड़ें उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले से गहराई से जुड़ी हुई हैं। लगभग 175 वर्ष पहले इस परिवार के पूर्वज भारत छोड़कर कैरेबियाई देश त्रिनिदाद और टोबैगो में जाकर पूरी तरह बस गए थे।
जब त्रिनिदाद और टोबैगो के स्थानीय अस्पतालों में बच्चे के इलाज की सभी संभावनाएं पूरी तरह समाप्त हो गईं, तो बेबस परिवार अपनी आखिरी उम्मीद लेकर दिल्ली पहुंचा। यहां अपोलो अस्पताल के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने तुरंत स्थिति को संभाला और बच्चे के इलाज की प्रक्रिया शुरू की।
जानिए क्या है यह दुर्लभ बीमारी पीएफआइसी-4?
अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सकों ने जांच के बाद बताया कि एरिक आनुवंशिक कारणों से होने वाले लिवर के एक ऐसे दुर्लभ रोग से गंभीर रूप से पीड़ित था, जिसमें पित्त बाहर नहीं निकल पाता है। यह पित्त लगातार शरीर के अंदर ही जमा होता रहता है, जिसे चिकित्सीय भाषा में पीएफआइसी-4 कहते हैं।
इस खतरनाक बीमारी ने एरिक के लिवर को अंतिम चरण (एंड-स्टेज लिवर फेल्योर) तक पहुंचा दिया था। वह गंभीर कुपोषण, पेट में अत्यधिक पानी भरने और कई अन्य शारीरिक जटिलताओं से बुरी तरह जूझ रहा था। उसका बचना एक चमत्कार की तरह था, जिसने डॉक्टरों को भी चौंका दिया।
जांबाज मां ने लिवर दान कर बचाई बेटे की जान
अपोलो अस्पताल की लिवर प्रत्यारोपण टीम के प्रमुख डॉ. नीरव गोयल के कुशल नेतृत्व में इस बेहद जटिल सर्जरी को अंजाम दिया गया। डॉक्टरों ने बताया कि शुरुआती जांच में बच्चे के पिता उपयुक्त डोनर नहीं पाए गए, जिसके बाद जांबाज मां ने अपने लिवर का हिस्सा दान कर बेटे को जीवनदान दिया।
डॉ. नीरव गोयल के अनुसार दुनिया भर में इतनी कम उम्र के शिशुओं के लिवर प्रत्यारोपण के 10 से भी कम सफल मामले दर्ज हैं। अपोलो अस्पताल में अब तक 600 से अधिक बाल लिवर प्रत्यारोपण हो चुके हैं, जिनमें से इस आनुवंशिक विकार से जुड़े केवल दो ही मामलों का सफल ऑपरेशन हुआ है।
इस सफल और ऐतिहासिक सर्जरी के बाद एरिक पूरी तरह स्वस्थ है और उसे महज 15 दिनों के भीतर अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। यह शानदार उपलब्धि न केवल एक मासूम बच्चे की जिंदगी बचाने की है, बल्कि यह भारत की उन्नत चिकित्सा और शल्य क्षमताओं की वैश्विक पहचान को भी मजबूत करती है।
Author: Gaurav Malhotra


