Delhi News: दिल्ली के हौजरानी इलाके में हुए भीषण हादसे के बाद नगर निगम (MCD) प्रशासन की नींद तो टूट गई है, लेकिन अब जिम्मेदार कर्मचारियों की बेहद चौंकाने वाली करतूत सामने आई है। नगर निगम के लापरवाह कर्मचारी वर्ष 2025-26 में ही दो बार ‘फ्लोरिश स्टे होटल’ का स्थलीय निरीक्षण करने पहुंचे थे।
हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर जांच के बाद तैयार रिपोर्ट में भ्रष्ट अधिकारियों ने दोनों बार इस बड़े और अवैध होटल को महज एक मामूली चाय की दुकान बता दिया। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद दिल्ली नगर निगम ने अब अपने पांच वरिष्ठ अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है।
प्राथमिक जांच रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा
इस नोटिस में मुख्य रूप से निरीक्षण करने वाले पब्लिक हेल्थ इंस्पेक्टर (PHI) और सहायक पब्लिक हेल्थ इंस्पेक्टर (APHI) से तुरंत जवाब मांगा गया है। ये बेहद शर्मनाक बातें नगर निगम की शुरुआती प्राथमिक जांच रिपोर्ट में खुलकर सामने आई हैं, जिसने पूरे महकमे को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
हौजरानी की दर्दनाक घटना के बाद महापौर प्रवेश वाही ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच के सख्त आदेश दिए थे। हालांकि, अभी तक इसकी आधिकारिक अंतिम रिपोर्ट तो नहीं आई है, लेकिन एमसीडी के विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक प्राथमिक जांच में कर्मचारियों की यह गंभीर मिलीभगत साफ पकड़ी गई है।
चाय-स्नैक्स के लाइसेंस की आड़ में चल रहा था खेल
रिपोर्ट में पता चला है कि ‘फ्लोरिश स्टे होटल’ पिछले कई वर्षों से एमसीडी से केवल ‘टी एंड स्नैक्स’ का लाइसेंस लेकर अवैध रूप से काम कर रहा था। चूंकि चाय और स्नैक्स के छोटे लाइसेंसों के लिए स्थलीय निरीक्षण अनिवार्य नहीं होता है, इसलिए अधिकारियों ने इसका पूरा फायदा उठाया।
कंप्यूटर द्वारा रैंडम तरीके से तय किए गए केवल 20 प्रतिशत लाइसेंसों का ही औचक निरीक्षण किया जाता था। यही मुख्य वजह रही कि पहले कभी इस संदिग्ध इमारत की कोई सही जांच ही नहीं हुई और होटल मालिक नियमों की धज्जियां उड़ाकर करोड़ों का कारोबार करता रहा।
जिम विवाद के बाद बदले थे सरकारी नियम
मार्च 2025 में दिल्ली के पश्चिमी जोन के एक जिम में हुए बड़े विवाद के बाद एमसीडी ने सभी तरह के त्वरित (इंस्टेंट) लाइसेंसों के लिए जमीनी निरीक्षण को पूरी तरह अनिवार्य कर दिया था। इसके तहत अकेले दक्षिणी जोन को ऐसे 1300 लाइसेंस मिले थे, जिनका भौतिक सत्यापन होना था।
इसके बाद हौजरानी वार्ड में तैनात पीएचआई हीरालाल, एपीएचआई केके गुप्ता और प्रिंस मान समेत दो अन्य को अलग-अलग समय पर इसकी जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। वर्ष 2025-26 में दो बार इस पूरी इमारत का जमीनी निरीक्षण हुआ, लेकिन अधिकारियों ने सच्चाई को छिपा लिया।
पर्यटन विभाग से मिला था बेड एंड ब्रेकफास्ट का लाइसेंस
निरीक्षण करने वाले अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट में केवल चाय की दुकान चलने की गलत जानकारी दी, लेकिन इतने बड़े होटल का कोई जिक्र नहीं किया। इस इमारत को साल 2024 से दिल्ली पर्यटन विभाग से ‘बेड एंड ब्रेकफास्ट’ का वैध लाइसेंस भी मिला हुआ था।
इसी विरोधाभास के बाद निगम ने साल 2023 से अब तक तैनात रहे पीएचआई और एपीएचआई को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। अधिकारियों से पूछा गया है कि इतनी बड़ी लापरवाही और धोखाधड़ी के लिए उनके खिलाफ सख्त कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई क्यों न की जाए।
विजिलेंस जांच शुरू, इसी हफ्ते गिर सकती है गाज
एमसीडी सूत्रों के अनुसार, अब यह बड़ी कार्रवाई केवल दक्षिणी जोन तक ही सीमित नहीं रहने वाली है। निगम के सभी जोनों के लापरवाह अधिकारियों और कर्मचारियों की कुंडली खंगाली जाएगी। इसके तहत भवन विभाग, जनस्वास्थ्य विभाग, जनरल ब्रांच और सेंट्रल लाइसेंसिंग विभाग जांच के दायरे में आएंगे।
निगमायुक्त ने इस पूरे भ्रष्टाचार के संबंध में विजिलेंस विभाग से एक बेहद विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। अधिकारियों का कहना है कि विजिलेंस की रिपोर्ट मिलते ही एमसीडी इसी सप्ताह दोषी अधिकारियों के तत्काल निलंबन और बर्खास्तगी के कड़े आदेश जारी कर सकता है।
Author: Gaurav Malhotra


