अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में गबन से मचा हड़कंप, हिडन कैमरे से खुली पोल तो एक कर्मी से हुई बड़ी रिकवरी

Uttar Pradesh News: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दानपात्र में डाली गई भारी धनराशि में गबन का बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। मंदिर प्रशासन से जुड़े सूत्रों के अनुसार, नोटों की गिनती के काम में लगे कुछ चालाक कर्मियों ने ही इस पूरे हेरफेर को अंजाम दिया है।

इस बड़े वित्तीय घोटाले की भनक लगते ही सुरक्षा एजेंसियों ने चार संदिग्ध कर्मियों को चिह्नित कर लिया है। गुप्त स्थान पर ले जाकर उनसे कड़ी पूछताछ भी की जा रही है। जांच टीम ने उनके पास से गबन की गई कुछ नकद राशि भी बरामद कर ली है।

हिडन कैमरे की पैनी नजर से पकड़ा गया पूरा गिरोह

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने पूरे दर्शन मार्ग पर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए लगभग चार दर्जन बड़े दानपात्र रखवाए हैं। इन पेटिकाओं में आने वाले चढ़ावे को हर दिन एकत्रित किया जाता है। नोटों को गिनने के लिए भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) को अधिकृत किया गया है।

एसबीआई ने इस काम के लिए आगे एक निजी सुरक्षा एजेंसी की सेवा ली है। गणना के दौरान ही यह गिरोह धीरे-धीरे रुपयों की चोरी कर रहा था। मंदिर परिसर में छिपाकर लगाए गए एक हिडन कैमरे की फुटेज से शुक्रवार को यह शर्मनाक करतूत पकड़ी गई।

बैंक खाते से पांच लाख रुपये की हुई त्वरित रिकवरी

पुलिस ने जब इस मामले के मुख्य संदिग्ध कर्मी अविनाश शुक्ल को हिरासत में लेकर पूछताछ की, तो उसने जुर्म कबूल कर लिया। उसने अपने निजी बैंक खाते में सरकारी पैसे जमा होने की बात स्वीकार की। इसके बाद पुलिस टीम उसे तुरंत संबंधित बैंक शाखा लेकर रवाना हुई।

अधिकारियों ने उसके खाते को फ्रीज कर गबन के पांच लाख रुपये सीधे ट्रस्ट के मुख्य खाते में वापस ट्रांसफर करवा दिए हैं। प्रारंभिक जांच से पता चला है कि चार-पांच कर्मियों का यह सक्रिय गुट काफी समय से दानपात्र की राशि में हेराफेरी कर रहा था।

अखिलेश यादव ने ट्वीट कर सीधे कोर्ट से की यह बड़ी मांग

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस पूरे प्रकरण को उजागर किया है। उन्होंने इस वित्तीय अनियमितता को बेहद संवेदनशील और शर्मनाक बताया है। उन्होंने सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए न्यायालय से स्वतः संज्ञान लेने की मांग की है।

दूसरी तरफ, ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने इस विवाद पर एक औपचारिक बयान जारी किया है। उन्होंने कहा कि मंदिर प्रशासन का आंतरिक ऑडिट नियमित रूप से होता रहता है। वर्तमान में भी रूटीन चेकिंग जारी है और अभी तक कोई उल्लेखनीय गड़बड़ी आधिकारिक रूप से सामने नहीं आई है।

Reported By: Ajay Mishra

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