Delhi News: एक के बाद एक लुटियंस दिल्ली के प्रमुख हरित क्षेत्रों (ग्रीन जोन) को अपने कब्जे में लेने की केंद्र सरकार की तैयारियों पर दिल्ली हाईकोर्ट ने बेहद कड़ी और तीखी आलोचना की है। दिल्ली जिमखाना क्लब और दिल्ली रेस क्लब के बाद अब जयपुर पोलो ग्राउंड खाली करने के केंद्र के नोटिस के खिलाफ कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।
केंद्र सरकार के इस फैसले के खिलाफ इंडियन पोलो एसोसिएशन (IPA) ने दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की थी। इस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने बेहद भावुक और सख्त टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि प्रदूषण की वजह से दिल्ली का दम घुट रहा है, अगर बची-कुची हरियाली भी चली गई, तो हमारा दम घुट जाएगा और हम मर जाएंगे, भगवान हमारी रक्षा करे।
20 मई के बेदखली नोटिस पर कोर्ट ने उठाया सवाल
न्यायाधीश नीना बंसल कृष्णा की एकल पीठ ने आईपीए की याचिका पर यह अहम सुनवाई की। केंद्र सरकार ने आगामी २० मई २०२६ को एक आधिकारिक नोटिस जारी कर इंडियन पोलो एसोसिएशन को रेस कोर्स इलाके में स्थित ऐतिहासिक जयपुर पोलो ग्राउंड को तुरंत खाली करने का एकतरफा आदेश दिया था।
हाईकोर्ट की पीठ ने इस मामले में दखल देते हुए पटियाला हाउस कोर्ट को बेदखली के इस नोटिस पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर १० जून तक हर हाल में अंतिम निर्णय लेने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही उच्च न्यायालय ने फिलहाल इस मुख्य याचिका का पूरी तरह से निपटारा कर दिया है।
हेरिटेज इमारतों को तोड़कर क्या 20 मंजिला भवन बनेंगे?
सुनवाई के दौरान अदालत ने केंद्र सरकार के स्थायी अधिवक्ता आशीष दीक्षित से तीखे सवाल पूछे। पीठ ने नाराजगी जताते हुए पूछा कि आखिर सरकार को खेल और हरियाली से भरा यह पोलो क्लब क्यों चाहिए? लुटियंस और एनडीएमसी (NDMC) क्षेत्र में पुरानी कालोनियों को तोड़कर पहले ही २०-२० मंजिला ऊंची इमारतें खड़ी कर दी गई हैं।
पीठ ने सरकार से पूछा कि जिमखाना जैसी ऐतिहासिक जगहों पर मौजूद हेरिटेज इमारतों का आखिर आप क्या करेंगे? क्या वहां भी २० मंजिला कंक्रीट के भवन बनाए जाएंगे? कोर्ट ने कहा कि एनडीएमसी इलाके में लोगों को जो थोड़ी-बहुत खुली हवा और हरी जगह मिली हुई है, सरकार उसे भी छीन रही है। सरकार को पिछले २०० वर्षों में कभी इस जमीन की जरूरत क्यों नहीं पड़ी?
केंद्र सरकार ने रक्षा कार्यों का हवाला देकर किया बचाव
अदालत में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के वकील आशीष दीक्षित ने सरकार के इस बड़े निर्णय का पुरजोर बचाव किया। उन्होंने दलील देते हुए कोर्ट को बताया कि यह बेशकीमती जमीन पूरी तरह से सार्वजनिक और देश के महत्वपूर्ण रक्षा कार्यों के लिए बेहद जरूरी हो गई है।
सरकारी वकील ने कहा कि मध्य दिल्ली के लुटियंस इलाके में सरकारी काम के लिए जगह की भारी कमी है, जबकि सरकार के सभी मुख्य कामकाज और कार्यालय इसी इलाके से संचालित होने हैं। हालांकि, कोर्ट सरकार के इन तर्कों से बिल्कुल भी संतुष्ट नजर नहीं आया और पर्यावरण संरक्षण को सर्वोपरि बताया।
Author: Gaurav Malhotra


