हिमाचल प्रदेश में खाद्य सुरक्षा विभाग की बड़ी कार्रवाई, देसी घी और सरसों तेल सहित चार फूड सैंपल फेल

Nahan News: हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में खाद्य पदार्थों की शुद्धता को लेकर बड़ी लापरवाही सामने आई है। खाद्य सुरक्षा विभाग की हालिया जांच रिपोर्ट में देसी घी, सरसों तेल और सरकारी राशन डिपो के दलिए के सैंपल फेल हो गए हैं। ये सभी खाद्य पदार्थ एफएसएसएआई के निर्धारित मानकों पर पूरी तरह खरे नहीं उतरे।

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सीटीएल कंडाघाट लैब की जांच में हुआ बड़ा खुलासा

स्वास्थ्य सुरक्षा एवं विनियमन विभाग नाहन की ओर से शिमला मुख्यालय को अंतिम विश्लेषण रिपोर्ट भेज दी गई है। खाद्य सुरक्षा अधिकारी प्रियंका कश्यप ने जिले के विभिन्न बाजारों से ये सैंपल एकत्रित किए थे। इसके बाद कंडाघाट स्थित कंपोजिट टेस्टिंग लैब में सरकारी विश्लेषक रिपु दमन कुमार ने इनकी बारीकी से जांच की।

विभाग से प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक कुल चार नमूनों में से दो देसी घी के सैंपल सबस्टैंडर्ड और मिसब्रांडेड घोषित किए गए हैं। इसके अलावा एक ब्रांड का देसी घी गुणवत्ता में सबस्टैंडर्ड मिला है। वहीं सरसों तेल और सरकारी डिपो के दलिए का सैंपल मिसब्रांडेड पाया गया है, जिससे हड़कंप मच गया है।

सरकारी राशन के दलिए में नियमों का भारी उल्लंघन

पांवटा साहिब क्षेत्र के खोड़री-माजरी से लिए गए सरकारी राशन डिपो के ‘हिम भोग दलिया’ का सैंपल मिसब्रांडेड मिला है। इस पैकेट पर नियमों के मुताबिक अनिवार्य कंज्यूमर केयर यानी उपभोक्ता शिकायत नंबर अंकित नहीं था। यह सीधे तौर पर पैकिंग और लेबलिंग नियमों के कड़े दिशा-निर्देशों का खुला उल्लंघन माना गया है।

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इसी तरह धौलाकुआं से लिए गए ‘हिमाचल फ्रेश देसी घी’ का सैंपल क्वालिटी और लेबलिंग दोनों मोर्चों पर फेल साबित हुआ। लैब टेस्ट में इस घी की ब्यूट्रो-रिफ्रैक्टोमीटर रीडिंग बावन दशमलव तीन दो आई है। जबकि सरकारी नियमों के तहत इसकी सामान्य सीमा केवल चालीस से चौवालिस के बीच ही होनी चाहिए।

केमिकल टेस्ट और रासायनिक मानकों में भारी अंतर

इस सैंपल की रीशर्ट माइस्ल वैल्यू भी मात्र तीन दशमलव तीन चार दर्ज की गई, जो चौबीस से कम बिल्कुल नहीं होनी चाहिए थी। वहीं आयोडीन वैल्यू उन्यासी दशमलव शून्य दो मिली, जिसका मानक पच्चीस से अड़तीस तय है। इस पैकेट पर छपी मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी डेट भी साफ तौर पर पढ़ने योग्य नहीं थी।

धौलाकुआं से लिए गए ‘तुलसी मस्टर्ड ऑयल’ के रासायनिक मानक तो सही मिले, लेकिन बोतल पर बिक्री मूल्य अंकित नहीं था। इसके अलावा माजरा से लिए गए ‘श्री दयाल प्योर देसी घी’ का सैंपल भी सबस्टैंडर्ड मिला। इसमें ब्यूट्रो-रिफ्रैक्टोमीटर रीडिंग पचास और रीशर्ट माइस्ल वैल्यू मात्र शून्य दशमलव चार तीन आई है।

खाद्य सुरक्षा विभाग ने चारों डिफॉल्टर कारोबारियों को सख्त कानूनी नोटिस जारी कर दिए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जनता की सेहत के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उपभोक्ताओं को सुरक्षित खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के लिए पूरे राज्य में यह सैंपलिंग अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।

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