Lahaul Spiti News: हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिले लाहुल स्पीति की स्पीति घाटी में एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या सामने आई है। यहां के मूल निवासियों में पित्त की पथरी की बीमारी देश के अन्य क्षेत्रों के मुकाबले बहुत ज्यादा पाई गई है। घाटी में हर पांचवां व्यक्ति यानी इक्कीस फीसदी से अधिक आबादी इस दर्दनाक बीमारी से पीड़ित है।
तीन बड़े चिकित्सा संस्थानों के विशेषज्ञों ने किया संयुक्त रिसर्च
यह महत्वपूर्ण और चौंकाने वाला शोध आईजीएमसी शिमला, पीजीआई चंडीगढ़ और आर्मी हॉस्पिटल रिसर्च एंड रेफरल नई दिल्ली के डॉक्टरों की संयुक्त टीम ने मिलकर किया है। आईजीएमसी अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राहुल राव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस विशेष वैज्ञानिक अध्ययन की विस्तृत रिपोर्ट जारी की है।
डॉ. राव ने बताया कि इस बीमारी के पीछे पहाड़ों की अत्यधिक ऊंचाई कोई मुख्य वजह नहीं है। इसके बजाय मरीजों की बढ़ती उम्र, महिलाओं की शारीरिक संरचना और फैटी लीवर जैसी गंभीर स्वास्थ्य स्थितियां इसके लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार हैं। टीम ने सटीक नतीजों के लिए साढ़े चार सौ लोगों का हेल्थ चेकअप किया।
ऊंचाई बढ़ने के साथ नहीं बदलता बीमारी का बड़ा खतरा
रिसर्च के दौरान स्पीति घाटी के तीस से सत्तर वर्ष के स्थानीय निवासियों का खाली पेट अल्ट्रासाउंड टेस्ट किया गया। डॉक्टरों ने इन सभी लोगों को समुद्र तल से ऊंचाई के अलग-अलग तीन ग्रुप्स में बांटा। अध्ययन में पैंतीस सौ मीटर से कम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बीमारी की दर चौबीस प्रतिशत मिली।
वहीं पैंतीस सौ से चार हजार मीटर की ऊंचाई पर यह आंकड़ा चौबीस दशमलव सात प्रतिशत रहा। इसके विपरीत चार हजार मीटर से अधिक ऊंचे इलाकों में यह बीमारी पंद्रह दशमलव तीन फीसदी दर्ज हुई। इन वैज्ञानिक आंकड़ों से साफ हो गया कि ऊंचाई बढ़ने से पथरी का रिस्क अपने आप नहीं बढ़ता।
बढ़ती उम्र और महिलाओं में बीमारी की संभावना दोगुनी
अध्ययन के लॉजिस्टिक रिग्रेशन विश्लेषण में कई बड़े जोखिम कारक सामने आए हैं। डॉक्टरों के अनुसार हर साल बढ़ती उम्र के साथ पित्त की पथरी का खतरा करीब चार फीसदी बढ़ जाता है। पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में यह गंभीर बीमारी होने का खतरा दो गुना से भी ज्यादा पाया गया है।
इसके अलावा जो लोग पहले से फैटी लीवर की समस्या से पीड़ित हैं, उनमें पथरी होने की संभावना एक दशमलव सात नौ गुना अधिक रहती है। हालांकि रिसर्च में मोटापा, शुगर और हाई ब्लड प्रेशर का इस बीमारी से कोई भी सीधा और स्वतंत्र संबंध देखने को बिल्कुल नहीं मिला है।
कठोर जलवायु और कम शारीरिक एक्टिविटी भी एक बड़ी वजह
विशेषज्ञों के मुताबिक स्पीति घाटी का बेहद ठंडा और कठोर मौसम भी अप्रत्यक्ष रूप से इस बीमारी को बढ़ावा देता है। सर्दियों के मौसम में तापमान शून्य से कई डिग्री नीचे गिर जाता है। इस वजह से लोग लंबे समय तक घरों के भीतर बंद रहते हैं और उनकी फिजिकल एक्टिविटी बंद हो जाती है।
इस बड़े खुलासे के बाद आईजीएमसी अस्पताल शिमला पूरे हिमाचल प्रदेश में पापुलेशन बेस्ड साइंटिफिक स्टडी शुरू करने जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य अलग-अलग क्षेत्रों की गंभीर बीमारियों और उनके भौगोलिक कारणों का पता लगाना है। इससे सरकार को बेहतर जनस्वास्थ्य नीतियां और योजनाएं बनाने में सीधी मदद मिलेगी।

