Shimla News: हिमाचल प्रदेश में नेचुरल फार्मिंग का स्कोप तेजी से बढ़ रहा है। राज्य के करीब ढाई लाख किसान इस नई तकनीक से जुड़ चुके हैं। चीफ मिनिस्टर सुक्खू ने कहा है कि उनका टारगेट हिमाचल को पहला नेचुरल फार्मिंग स्टेट बनाना है। इसके लिए सरकार किसानों को पूरा सपोर्ट कर रही है।
सैटरडे को एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट की एक अहम रिव्यू मीटिंग हुई। इसमें चीफ मिनिस्टर ने ऑफिसर्स को नेचुरल फार्मिंग प्रमोट करने के कड़े इंस्ट्रक्शंस दिए। उन्होंने कहा कि इन स्पेशल प्रोडक्ट्स के लिए एक अलग मार्केटिंग विंग बनाया जाएगा। इन प्रोडक्ट्स की बेहतर सेल के लिए डिजिटल मार्केटिंग प्लेटफार्म का भी भरपूर इस्तेमाल होगा।
हिमाचल सरकार ने नेचुरल फसलों के लिए तय किया एमएसपी
हिमाचल प्रदेश पूरे देश में पहला ऐसा राज्य बन गया है। इसने नेचुरल फार्मिंग वाली सभी फसलों पर मिनिमम सपोर्ट प्राइस यानी एमएसपी सिस्टम लागू किया है। सरकार की नई पॉलिसी के मुताबिक नेचुरल तरीके से उगाए गए गेहूं का एमएसपी अस्सी रुपये तय है। वहीं, मक्की का एमएसपी पचास रुपये प्रति किलोग्राम फिक्स कर दिया गया है।
इसके अलावा कच्ची हल्दी का रेट डेढ़ सौ रुपये प्रति किलोग्राम तय हुआ है। पांगी घाटी के जौ का अस्सी रुपये और अदरक का एमएसपी तीस रुपये फिक्स हुआ है। इस पॉजिटिव स्टेप के बाद खेती छोड़ चुके किसान भी अब दोबारा एग्रीकल्चर सेक्टर में लौट रहे हैं। वह नेचुरल फार्मिंग में अपना काफी ज्यादा इंट्रेस्ट भी दिखा रहे हैं।
दूध उत्पादकों को फायदा, डेयरी फार्मिंग के लिए एमएसपी बढ़ाया
स्टेट गवर्नमेंट ने मिल्क प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए भी बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने गाय के दूध का एमएसपी बत्तीस से बढ़ाकर इकसठ रुपये कर दिया है। वहीं, भैंस के दूध का एमएसपी सैंतालीस रुपये से बढ़ाकर इकहत्तर रुपये प्रति लीटर हुआ है। इससे डेयरी फार्मिंग से जुड़े सभी किसानों को सीधा और बड़ा प्रॉफिट मिलेगा।
चीफ मिनिस्टर ने कांगड़ा जिले के बड़ा भंगाल एरिया को नेचुरल फार्मिंग पंचायत बनाने को कहा है। अधिकारियों को यह प्रोसेस जल्द से जल्द पूरा करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। बड़ा भंगाल की मशहूर राजमाह को जियोग्राफिकल इंडिकेशन यानी जीआई टैग दिलाने की प्रक्रिया शुरू होगी। इससे लोकल किसानों की इनकम में बड़ा इजाफा देखने को मिलेगा।

