Business News: नया फाइनेंशियल ईयर शुरू होते ही सैलरीड और नॉन-सैलरीड क्लास के बीच आईटीआर को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। अगर 12 लाख रुपये तक की आमदनी टैक्स फ्री होने के बाद भी आप उलझन में हैं, तो निल आईटीआर दाखिल करने के फायदे आपको जरूर हैरान कर देंगे।
जीरो टैक्स होने पर भी आईटीआर भरना क्यों है स्मार्ट फैसला?
कई बार डिडक्शन या रिबेट के कारण आपकी टैक्स लायबिलिटी पूरी तरह जीरो हो जाती है। इसके बावजूद समय पर आईटीआर फाइल करना भविष्य के लिए बेहद फायदेमंद साबित होता है। यह सरकारी दस्तावेज आपकी फाइनेंशियल हिस्ट्री को मजबूत बनाता है। आइए जानते हैं निल आईटीआर दाखिल करने के पांच बड़े कारण।
इसका सबसे पहला बड़ा फायदा यह है कि आप अपना टैक्स रिफंड आसानी से क्लेम कर सकते हैं। कई बार बैंक एफडी के ब्याज, सेविंग अकाउंट, फ्रीलांसिंग या शेयर बाजार के डिविडेंड पर अनजाने में टीडीएस काट लिया जाता है। इस कटे हुए पैसे को वापस पाने का एकमात्र जरिया आईटीआर दाखिल करना ही है।
दूसरा फायदा यह है कि लोन और क्रेडिट कार्ड मिलने की राह आसान हो जाती है। जब भी आप होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन के लिए आवेदन करते हैं, तो बैंक आपसे पिछले कुछ वर्षों का वित्तीय रिकॉर्ड मांगते हैं। जीरो टैक्स वाला आईटीआर आपकी नियमित आमदनी का सबसे पुख्ता और वैध प्रमाण माना जाता है।
विदेश यात्रा और शेयर बाजार के नुकसान में मिलती है बड़ी मदद
तीसरा फायदा यह है कि वीजा और विदेश यात्रा के लिए यह एक बेहद जरूरी डॉक्यूमेंट है। यदि आप पढ़ाई, नौकरी या घूमने के लिए अमेरिका, ब्रिटेन या यूरोप का वीजा अप्लाई करते हैं, तो दूतावास पिछले 3 से 5 साल का आईटीआर मांगते हैं। इससे आपकी वित्तीय विश्वसनीयता बढ़ती है और वीजा रिजेक्ट नहीं होता।
चौथा फायदा यह है कि आप शेयर बाजार या बिजनेस के घाटे को अगले सालों के लिए कैरी फॉरवर्ड कर सकते हैं। म्यूचुअल फंड या शेयर्स में हुए नुकसान का इस्तेमाल भविष्य के मुनाफे पर टैक्स बचाने के लिए किया जा सकता है। लेकिन इस नियम का लाभ तभी मिलेगा, जब आप समय पर जीरो आईटीआर भरेंगे।
पांचवां फायदा यह है कि इससे आपका फाइनेंशियल रिकॉर्ड पूरी तरह साफ और मजबूत रहता है। आयकर विभाग की एनुअल इंफॉर्मेशन सिस्टम (AIS) जैसी आधुनिक व्यवस्थाएं आपके हर छोटे-बड़े ट्रांजेक्शन पर नजर रखती हैं। लगातार आईटीआर फाइल करने से भविष्य में टैक्स डिपार्टमेंट के नोटिस या स्क्रूटनी का खतरा खत्म हो जाता है।
Author: Rajesh Kumar

