Delhi News: दिल्ली की एक स्थानीय उपभोक्ता अदालत ने बैंक की लापरवाही के खिलाफ एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। एक मामले में एटीएम ट्रांजैक्शन फेल होने के बावजूद बैंक द्वारा पैसा न लौटाने पर आयोग ने बैंक ऑफ इंडिया को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने बैंक को मूल रकम के साथ-साथ उपभोक्ता को मुआवजा और कानूनी खर्च देने का आदेश दिया है।
जिला उपभोक्ता विवाद निपटान आयोग ने इस मामले को ‘सेवा में कमी’ का स्पष्ट उदाहरण माना है। आयोग के अनुसार, बैंकों को असफल एटीएम लेनदेन के प्रति अधिक जवाबदेह होने की आवश्यकता है। यह फैसला उन लाखों ग्राहकों के लिए बड़ी राहत है जो अक्सर तकनीकी खामियों के कारण अपने पैसे के लिए बैंक के चक्कर काटते रहते हैं।
क्या था पूरा मामला?
जहांगीरपुरी की रहने वाली चंदा ने 26 मई, 2022 को एक एटीएम से 10,000 रुपये निकालने का प्रयास किया था। तकनीकी कारण से ट्रांजैक्शन फेल हुआ और कैश नहीं निकला, लेकिन उनके बैंक खाते से पैसे कट गए। शिकायतकर्ता ने बार-बार बैंक से गुहार लगाई, लेकिन लंबी अवधि तक कोई समाधान नहीं निकाला गया।
आयोग के अध्यक्ष दिव्य ज्योति जयपुरियार और सदस्य रश्मि बंसल की पीठ ने पाया कि बैंक अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रहा है। सुनवाई के दौरान बैंक ने न तो अपना पक्ष रखा और न ही आयोग के नोटिस का जवाब दिया, जिसके बाद बैंक के खिलाफ एकतरफा फैसला सुनाया गया।
आरबीआई के सख्त दिशानिर्देश
उपभोक्ता आयोग ने अपने आदेश में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के नियमों का हवाला दिया। आरबीआई के अनुसार, एटीएम ट्रांजैक्शन फेल होने की स्थिति में बैंकों को 5 दिनों के भीतर ग्राहक के खाते में राशि वापस करनी अनिवार्य है। यदि बैंक ऐसा करने में देरी करता है, तो उसे प्रतिदिन 100 रुपये के हिसाब से जुर्माना भरना होगा।
यह मुआवजा केवल इसलिए नहीं है कि ग्राहक को उसका पैसा वापस मिले, बल्कि यह बैंकों की लापरवाही के खिलाफ एक दंड के रूप में है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस फैसले से बैंकों की कार्यप्रणाली में सुधार आएगा और ग्राहकों को अनावश्यक मानसिक और आर्थिक उत्पीड़न से बचाने में मदद मिलेगी।
Author: Rajesh Kumar


