Global News: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव पूरी दुनिया के लिए एक बहुत बड़ा खतरा बन गया है। संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के अर्थशास्त्रियों ने इस मुद्दे पर एक गंभीर चेतावनी जारी की है। इस तनाव से वैश्विक अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है। महंगाई आसमान छू सकती है और विकास की रफ्तार थम सकती है।
अर्थव्यवस्था की रफ्तार पर पड़ेगा सीधा असर
संयुक्त राष्ट्र के अर्थशास्त्रियों का मानना है कि साल 2026 में वैश्विक आर्थिक विकास दर तेजी से गिर सकती है। यह दर घटकर लगभग 2.5 प्रतिशत तक आ सकती है। पहले इसके 2.7 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया था। यदि हालात जल्द नहीं सुधरे तो यह आंकड़ा 2.1 प्रतिशत तक भी गिर सकता है।
100 साल की सबसे भयानक मंदी का डर
यूएन अधिकारी शांतनु मुखर्जी ने इस स्थिति को बेहद चिंताजनक बताया है। उनके अनुसार यह पिछले 100 वर्षों में सबसे धीमी आर्थिक वृद्धि हो सकती है। इस बड़े संकट में कोविड-19 महामारी और 2008 की मंदी का असर भी शामिल है। यह दुनिया के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं होने वाला है।
तेल और सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित
होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी तरह की बाधा पूरी सप्लाई चेन को तोड़ सकती है। इससे दुनिया भर में तेल, गैस और फर्टिलाइज़र की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित होगी। इसका सीधा और सबसे बुरा असर वैश्विक बाजारों पर पड़ेगा। हर तरह के सामान की उत्पादन लागत में अचानक भारी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
आम आदमी पर महंगाई की दोहरी मार
इस संकट से वैश्विक महंगाई दर बढ़कर 3.9 प्रतिशत तक जा सकती है। विकसित देशों में यह दर 2.6 से 2.9 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। वहीं, विकासशील देशों की हालत और भी ज्यादा खराब होगी। वहां महंगाई दर 4.2 से उछलकर 5.2 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। यह आम लोगों को बहुत रुलाएगा।
संयुक्त राष्ट्र ने साफ किया है कि ईंधन की कीमतों में इजाफे का असर हर सेक्टर पर पड़ेगा। इससे उत्पादन और ट्रांसपोर्ट का खर्च कई गुना बढ़ जाएगा। इस भारी दबाव का सीधा असर आम लोगों की कमाई और खर्च पर होगा। दुनिया की अर्थव्यवस्था फिर से पटरी से उतरने की कगार पर खड़ी है।
Author: Pallavi Sharma

