रुपये में हाहाकार: लगातार 9वें दिन लुढ़का भारतीय करेंसी, 97 के करीब पहुंची डॉलर की कीमत

Business News: भारतीय रुपया बुधवार को एक और बड़ी गिरावट का शिकार हुआ। डॉलर के मुकाबले रुपये में 0.3 प्रतिशत की कमजोरी आई है, जिसके चलते यह 96.96 के निचले स्तर पर पहुंच गया। पिछले नौ सत्रों से लगातार जारी इस गिरावट ने निवेशकों और आम जनता की चिंताएं बढ़ा दी हैं। अब बाजार की नजरें 97 के मनोवैज्ञानिक स्तर पर टिकी हैं।

क्यों गिर रही है रुपये की साख?

रुपये की इस दुर्दशा के पीछे कई गंभीर कारण हैं। विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भारतीय बाजार से तेजी से अपना निवेश निकाल रहे हैं। इसके साथ ही, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण भारत का आयात बिल भारी हो गया है। भू-राजनीतिक तनाव के चलते डॉलर की मांग में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है, जिससे रुपया दबाव में है।

एशिया की सबसे कमजोर करेंसी

साल 2026 में भारतीय रुपया एशिया की सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली करेंसी बन गया है। मई के महीने में अब तक इसमें 1.5 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है, जबकि साल की शुरुआत से अब तक यह 7 प्रतिशत से अधिक टूट चुका है। विशेषज्ञों के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने का डर रुपये को लगातार अस्थिर बना रहा है।

महंगाई और चालू खाता घाटे का खतरा

कच्चे तेल के महंगे होने से भारत का चालू खाता घाटा (CAD) बढ़ने का गंभीर जोखिम पैदा हो गया है। आयात महंगा होने से देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। इसके अलावा, मध्य पूर्व से आने वाले रेमिटेंस पर संकट और विदेशी निवेश घटने से भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर पर भी नकारात्मक असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

निवेशकों और आम जनता के लिए चुनौती

रुपये में जारी यह गिरावट महंगाई को और हवा देगी, क्योंकि पेट्रोल, डीजल और अन्य आयातित वस्तुओं की कीमतें बढ़ेंगी। विदेशी निवेशकों का भरोसा कम होने से बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। अर्थशास्त्री चेता रहे हैं कि यदि भू-राजनीतिक हालात जल्द नहीं सुधरे, तो भारतीय करेंसी को और भी कठिन दौर का सामना करना पड़ सकता है।

Author: Rajesh Kumar

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