Hapur News: सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (मोर्थ) के नए नियमों के तहत हापुड़ और बुलंदशहर के आरटीओ कार्यालयों में कमर्शियल वाहनों की मैनुअल फिटनेस जांच बृहस्पतिवार से पूरी तरह बंद कर दी गई है। अब दोनों जिलों के वाहन स्वामियों को फिटनेस सर्टिफिकेट के लिए दूसरे पड़ोसी जिलों के चक्कर लगाने होंगे।
हापुड़ और बुलंदशहर में समय सीमा बीतने के बाद भी नहीं खुला एक भी एटीएस सेंटर
मिनिस्ट्री ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट ने वाहनों की फिटनेस जांच में पारदर्शिता लाने के लिए 30 जून 2026 तक सभी जिलों में ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (एटीएस) व्यवस्था लागू करने की लास्ट डेट तय की थी। इस कड़े निर्देश के बाद आरटीओ प्रशासन ने मैनुअल चेकिंग तो बंद कर दी, लेकिन दोनों जिलों में एक भी नया एटीएस सेंटर शुरू नहीं हो पाया।
विभागीय सूत्रों के अनुसार स्थानीय स्तर पर ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए आया कोई भी प्राइवेट एप्लीकेशन अभी तक फाइनल अप्रूवल तक नहीं पहुंच सका है। सरकारी आदेश लागू होने के बावजूद लोकल लेवल पर मशीनी जांच की कोई एडवांस सुविधा उपलब्ध न होने से ट्रांसपोर्ट बिजनेस से जुड़े लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
ट्रक, बस और टैक्सी मालिकों पर पड़ेगा अतिरिक्त समय और पैसों का भारी बोझ
इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा और सीधा असर ट्रक, बस, कमर्शियल टैक्सी और ऑटो चालकों पर पड़ेगा। वाहन मालिकों को अब अपना जरूरी फिटनेस सर्टिफिकेट बनवाने के लिए उन नजदीकी जिलों का रुख करना होगा जहां अधिकृत एटीएस सेंटर एक्टिव हैं। इससे उनका काफी कीमती समय बर्बाद होगा और ट्रांसपोर्टेशन का खर्च भी बढ़ेगा।
गाजियाबाद संभाग के आरटीओ प्रमोद कुमार सिंह ने बताया कि मंत्रालय के आदेश पर मैनुअल चेकिंग पूरी तरह बंद है और अब केवल कंप्यूटरीकृत एटीएस सेंटर पर ही गाड़ियों की जांच मान्य होगी। एटीएस में ब्रेक, सस्पेंशन, स्टीयरिंग, हेडलाइट और व्हील एलाइनमेंट की जांच बिना किसी इंसानी दखल के पूरी तरह सेंसर और एडवांस मशीनों से की जाती है।

