New Delhi News: केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने देश की तेल आयात पर निर्भरता को खत्म करने की दिशा में बड़ा बयान दिया है। उन्होंने पेट्रोल में 100 फीसदी इथेनॉल मिलाने यानी E100 के लक्ष्य पर काम करने की अपील की है। गडकरी का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव ने एनर्जी सप्लाई चेन को कमजोर कर दिया है। इसलिए अब ऊर्जा के मोर्चे पर आत्मनिर्भर बनना केवल पर्यावरण नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का अनिवार्य सवाल बन गया है .
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री ने इंडियन फेडरेशन ऑफ ग्रीन एनर्जी के ग्रीन ट्रांसपोर्ट कॉन्क्लेव में यह बात कही। उन्होंने मौजूदा हालात पर चिंता जताते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण हम ऊर्जा संकट का सामना कर रहे हैं। ऐसे में भारत के लिए वैकल्पिक ईंधन और जैव-ईंधन का उत्पादन बढ़ाना समय की सबसे बड़ी मांग है। गडकरी ने साफ कहा कि अब देश को निकट भविष्य में शत-प्रतिशत इथेनॉल सम्मिश्रण की ओर बढ़ना चाहिए ।
तेल आयात पर 22 लाख करोड़ का बोझ और सुरक्षा की चिंता
गडकरी ने आंकड़ों के जरिए भारत की मौजूदा कमजोर स्थिति को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि वर्तमान में देश अपनी कुल तेल जरूरत का लगभग 87 फीसदी हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। इस आयात के एवज में सरकारी खजाने से हर साल करीब 22 लाख करोड़ रुपये विदेशों में चले जाते हैं। यह भारी-भरकम राशि न केवल अर्थव्यवस्था पर दबाव डालती है, बल्कि प्रदूषण का भी एक बड़ा कारण बनती है ।
मंत्री ने पश्चिम एशिया में चल रहे “संकट” का हवाला देते हुए इस व्यवस्था की संवेदनशीलता पर रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आने वाला उतार-चढ़ाव सीधे भारतीय अर्थव्यवस्था को झटका देता है। विशेषज्ञों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में हर 10 डॉलर की बढ़ोतरी पर देश के आयात बिल में लगभग 13 से 14 अरब डॉलर का अतिरिक्त भार पड़ सकता है। यही कारण है कि सरकार अब परिवहन क्षेत्र को इन वैश्विक उठापटक से अलग करने की रणनीति पर तेजी से आगे बढ़ रही है ।
अन्नदाता बनेगा ऊर्जादाता: किसानों को मिलेगा दोहरा लाभ
100 प्रतिशत इथेनॉल मॉडल की ओर बढ़ने का एक सबसे बड़ा सामाजिक-आर्थिक लाभ कृषि क्षेत्र को होने वाला है। सरकार की योजना देश के विशाल कृषि अधिशेष का उपयोग ईंधन उत्पादन में करने की है। इस बदलाव से किसानों की आय में सीधे तौर पर इजाफा होगा। गडकरी ने इस विचार को दोहराते हुए कहा कि यह कदम किसानों को “अन्नदाता” से “ऊर्जादाता” बनाने में मील का पत्थर साबित होगा। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्थायी बढ़ावा मिलने की प्रबल संभावना है ।
गौरतलब है कि भारत सरकार ने वर्ष 2023 में 20 फीसदी इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) को पूरे देश में लॉन्च किया था। वर्तमान में भारतीय वाहन इंजन में मामूली बदलाव करके E20 पेट्रोल पर सुचारू रूप से चल सकते हैं। अब सरकार की नजर ब्राजील जैसे देशों की तर्ज पर पूर्ण इथेनॉल अपनाने पर है, जहां 100 फीसदी इथेनॉल (E100) मॉडल पहले से ही सफलतापूर्वक लागू है। सूत्रों के अनुसार, भविष्य में E20 मानक मोनोफ्यूल रहेगा, जबकि E25, E35, E85 और E100 जैसे उच्च मिश्रण वैकल्पिक रूप से उपलब्ध होंगे ।
हाइड्रोजन और सर्कुलर इकोनॉमी पर भी रहेगा फोकस
गडकरी ने अपने संबोधन में इथेनॉल के अलावा ग्रीन हाइड्रोजन को भी भविष्य का ईंधन बताया। उन्होंने कहा कि हाइड्रोजन को ऊर्जा के रूप में अपनाने में लागत और परिवहन सबसे बड़ी चुनौतियां हैं। उन्होंने लक्ष्य रखा कि एक किलोग्राम हाइड्रोजन के उत्पादन की लागत को घटाकर एक डॉलर तक लाना होगा। ऐसा होने पर ही भारत वैश्विक स्तर पर ऊर्जा का निर्यातक देश बन सकता है। इसके लिए उन्होंने कचरे से हाइड्रोजन उत्पादन पर जोर देने की भी वकालत की ।
हालांकि, गडकरी ने यह भी स्पष्ट किया कि पेट्रोल और डीजल वाहनों को हतोत्साहित करने की जरूरत तो है, लेकिन सरकार लोगों को इन्हें खरीदने से जबरन रोक नहीं सकती। उन्होंने ऑटोमोबाइल कंपनियों से आग्रह किया कि वे लागत की बजाय गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित करें। उनके अनुसार, यही रणनीति उन्हें नए बाजारों में पैठ बनाने में सहायता करेगी। उन्होंने E20 को लेकर सोशल मीडिया पर उठ रही चिंताओं पर भी टिप्पणी करते हुए इसे पेट्रोलियम सेक्टर की लॉबिंग का हिस्सा करार दिया ।


