Delhi News: दिल्ली हाईकोर्ट ने नेहरू प्लेस इलाके में सड़क किनारे सामान बेचने वाले गैर-कानूनी वेंडरों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने नगर निगम (MCD) को निर्देश दिया है कि वह तुरंत इन अवैध विक्रेताओं को हटाए। साथ ही, कोर्ट ने इस इलाके को ‘नो-वेंडिंग’ और ‘नो-हॉकिंग’ जोन घोषित करते हुए दो याचिकाकर्ताओं पर जुर्माना भी लगाया।
अदालत ने क्यों बुलाया ‘नो-वेंडिंग’ जोन?
जस्टिस प्रतिभाएम. सिंह और जस्टिस मधु जैन की बेंच ने स्पष्ट किया कि नेहरू प्लेस कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में ठेले लगाने वालों को अनुमति देना सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। कोर्ट ने कहा कि यह इलाका पहले से ही अवैध विक्रय और रेहड़ी-पटरी वालों के लिए प्रतिबंधित है। यहां सिर्फ सीमित संख्या में अधिकृत वेंडरों को ही काम करने की इजाजत है, लेकिन उनके लिए भी सुप्रीम कोर्ट ने दूसरी जगह शिफ्ट करने के निर्देश दिए हैं।
हाईकोर्ट ने क्यों ठुकराई याचिका?
यह आदेश दोवेंडरों की याचिका पर आया। उन्होंने मांग की थी कि अधिकारी उन्हें मानसरोवर बिल्डिंग के सामने सामान बेचने से न रोकें। लेकिन कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। न्यायालय ने कहा कि इन याचिकाकर्ताओं के पास नेहरू प्लेस में व्यापार करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। अदालत को समझ नहीं आया कि आखिर उन्हें यहां काम करने की इजाजत कैसे मिल गई।
10 हजार रुपये का जुर्माना और MCD को सख्त निर्देश
बेंच नेदोनों याचिकाकर्ताओं पर 10-10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया और MCD को आदेश दिया कि वह यह सुनिश्चित करे कि नेहरू प्लेस में कोई भी गैर-कानूनी वेंडर सामान न बेच सके। कोर्ट ने कहा कि निगम तुरंत कार्रवाई करे और यह सुनिश्चित करे कि प्रतिबंधित जोन में किसी भी अवैध विक्रेता को काम न करने दिया जाए। याचिकाकर्ता किसी भी तरह की राहत के हकदार नहीं हैं।


