Washington News: एक महीने से अधिक समय से ईरान और अमेरिका के बीच भयंकर तनाव जारी है। यह संघर्ष फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा है। अमेरिका में प्रदर्शनों का सामना कर रहे डोनाल्ड ट्रंप पर भारी दबाव है। उनका एक बेहद गुप्त और खतरनाक मिशन अभी अधूरा है। यह मिशन ईरान से संवर्धित यूरेनियम को बाहर निकालना है। अमेरिकी सेना 32 साल पहले भी ऐसे ही एक दुस्साहसिक अभियान को सफलतापूर्वक अंजाम दे चुकी है। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि क्या ट्रंप ईरान की धरती पर इस ऑपरेशन को अंजाम दे पाएंगे।
ईरान में अमेरिकी सेना के एक्शन की तैयारी
अमेरिका एक बेहद खतरनाक योजना पर काम कर रहा है। अखबार ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका ईरान से भारी मात्रा में यूरेनियम निकालना चाहता है। यह मात्रा इतनी अधिक है कि इससे 10 से 11 परमाणु बम आसानी से बन सकते हैं। ट्रंप ईरान से 450 किलोग्राम संवर्धित यूरेनियम बाहर निकालने की सोच रहे हैं। इसके लिए वे ईरान की जमीन पर एक बड़ा सैन्य ऑपरेशन कर सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो यह आधुनिक दुनिया का सबसे जटिल और खतरनाक मिशन होगा।
ईरान की सीमा में घुसेंगे अमेरिकी कमांडो
इस मिशन को अंजाम देने के लिए अमेरिकी विशेष बलों को ईरान के अंदर उतारा जाएगा। यह कोई एक दिन का काम नहीं होगा। अमेरिकी सैनिकों को कई दिनों तक ईरानी क्षेत्र में रुकना पड़ सकता है। ट्रंप ने अभी इस ग्राउंड ऑपरेशन पर अंतिम मुहर नहीं लगाई है। हालांकि वे इस योजना पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। इस कदम के पीछे एक ऐतिहासिक मिशन की सफलता भी है। अमेरिका 32 साल पहले ऐसा ही एक जटिल ऑपरेशन कर चुका है।
कजाकिस्तान में हुआ था प्रोजेक्ट सफायर
जब सोवियत संघ का विघटन हुआ था, तब दुनिया पर एक बड़ा खतरा मंडरा रहा था। कजाकिस्तान में 600 किलोग्राम अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम रखा था। यह यूरेनियम अल्फा क्लास पनडुब्बियों के लिए बना था। इससे 20 परमाणु बम बनाए जा सकते थे। आतंकियों या हथियार माफिया के हाथ लगने पर यह तबाही ला सकता था। तब तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने एक गुप्त ऑपरेशन को हरी झंडी दिखाई थी। इस अभियान को ‘प्रोजेक्ट सफायर’ नाम दिया गया था।
ईरान का मिशन कजाकिस्तान से कितना अलग
महीनों की कूटनीति के बाद अमेरिका ने कजाकिस्तान से यूरेनियम निकाल लिया था। आज ट्रंप भी ईरान में उसी तरह का सफल ऑपरेशन करना चाहते हैं। लेकिन कजाकिस्तान और ईरान की स्थितियां बिल्कुल अलग हैं। ईरान के पास एक मजबूत और सक्रिय सेना है। वहां किसी भी अमेरिकी घुसपैठ का भारी विरोध होगा। अब यह देखना होगा कि क्या अमेरिका ईरान के अंदर घुसकर अपने मंसूबों में कामयाब हो पाएगा।


