Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध इस्लामिक शिक्षण संस्थान दारुल उलूम देवबंद को लेकर नया विवाद छिड़ गया है। एक हिंदू संगठन ने मस्जिद के नीचे प्राचीन शिव मंदिर होने का बड़ा दावा किया है। इस मांग को लेकर कलेक्ट्रेट परिसर में भारी विरोध प्रदर्शन हुआ है।
हिंदू रक्षा दल ने की वैज्ञानिक सर्वे और खुदाई कराने की मांग
हिंदू रक्षा दल के कार्यकर्ताओं ने गुरुवार को सहारनपुर जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर एक प्रशासनिक ज्ञापन सौंपा है। संगठन के उत्तराखंड प्रदेशाध्यक्ष ललित शर्मा ने दावा किया कि दारुल उलूम परिसर के ठीक नीचे प्राचीन शिवलिंग मौजूद है। उन्होंने पुख्ता प्रमाण जुटाने के लिए तुरंत वैज्ञानिक जांच की मांग की है।
ललित शर्मा ने जिला प्रशासन को चुनौती देते हुए कहा कि यदि खुदाई में मंदिर नहीं मिलता तो उन्हें फांसी दे दी जाए। उन्होंने दावा किया कि यह गंभीर मामला करोड़ों सनातनियों की गहरी आस्था से जुड़ा है। स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के आधार पर संगठन ने इस कार्रवाई पर जोर दिया है।
मंदिर के अवशेष मिलने पर अदालत में जनहित याचिका करेगी दायर
प्रदर्शनकारियों ने कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर जमकर नारेबाजी की और प्रशासनिक तंत्र से निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने को कहा। संगठन ने मांग रखी है कि यदि सर्वे में कोई धार्मिक अवशेष मिलता है, तो उसे तुरंत संरक्षित किया जाए। इसके बाद मामले में कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
हिंदू रक्षा दल ने साफ किया कि पुरातात्विक साक्ष्य मिलने पर वे जल्द ही अदालत में एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल करेंगे। वे सरकार से इस प्राचीन स्थल को मुक्त कराने की कानूनी मांग करेंगे। इस नए घटनाक्रम से देवबंद इलाके में सामाजिक सरगर्मी अचानक काफी बढ़ गई है।
जानिए क्या है देश के प्रमुख संस्थान दारुल उलूम का इतिहास
सहारनपुर का दारुल उलूम देवबंद दुनिया भर में इस्लामिक शिक्षा और अपने फतवों के लिए जाना जाता है। इस ऐतिहासिक संस्थान की स्थापना वर्ष 1866 में हुई थी। अब मस्जिद के नीचे मंदिर होने के इस सनसनीखेज दावे के बाद यह मामला देश के राजनीतिक गलियारों में गूंजने लगा है।
प्रदर्शन के दौरान ललित शर्मा ने सांसद इकरा हसन और समाजवादी पार्टी पर भी तीखा जुबानी हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल केवल राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए जातीय विभाजन कर रहे हैं। वे आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव को सामाजिक तनाव के सहारे जीतना चाहते हैं।
सपा पर अलग-अलग समुदायों के बीच जानबूझकर कड़वाहट पैदा करने का गंभीर आरोप लगाया गया है। इस पूरे विवादित मामले पर जिला प्रशासन या दारुल उलूम प्रबंधन की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर रख रही हैं।
Author: Ajay Mishra

