Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से खाकी और प्रशासन को झकझोर देने वाली एक बेहद दर्दनाक तस्वीर सामने आई है। न्याय की आस में 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थी भीषण और झुलसा देने वाली गर्मी के बीच लखनऊ की तपती सड़कों पर घुटनों के बल रेंगते हुए अपना हक मांग रहे हैं।
सड़क पर रेंगते युवाओं का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल
इन आंदोलनकारी दलित और पिछड़े युवाओं का दर्द देखकर अब इस पूरे मामले पर भारी सियासी घमासान शुरू हो गया है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर इस बेबसी का एक वीडियो साझा किया है। कांग्रेस ने राज्य सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि लखनऊ में भर्ती घोटाले से निराश युवा सड़कों पर रेंग रहे हैं।
विपक्ष ने बीजेपी सरकार पर लगाया बड़ा आरोप
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार ने इस बड़ी शिक्षक भर्ती में बड़े पैमाने पर आरक्षण घोटाला किया है। इस कथित धांधली ने दलित और पिछड़े वर्ग के होनहार युवाओं के सपनों को पूरी तरह रौंद दिया है। ये पीड़ित युवा बीते चार साल से लगातार नौकरी के लिए कड़ा संघर्ष कर रहे हैं।
जानिए आखिर क्या है शिक्षक भर्ती का पूरा विवाद
यह पूरा गंभीर विवाद दिसंबर 2018 में निकाली गई 69,000 सहायक शिक्षकों की बंपर भर्ती से जुड़ा हुआ है। इसकी परीक्षा जनवरी 2019 में आयोजित हुई और नतीजा 2020 में घोषित किया गया। इसके बाद आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि भर्ती में मूल आरक्षण नियमों की घोर अनदेखी की गई है।
नियमों के उल्लंघन से हजारों सीटें प्रभावित होने का दावा
प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों के अनुसार इस भर्ती प्रक्रिया में सरकार ने नियमों के मुताबिक तय कोटा नहीं दिया। ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण की जगह मात्र 3.86 प्रतिशत कोटा मिला। वहीं एससी वर्ग को भी 21 प्रतिशत के स्थान पर केवल 16.2 प्रतिशत आरक्षण दिया गया, जिससे करीब 19,000 सीटों पर गड़बड़ी हुई।
हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला
इस बड़ी विसंगति के कारण करीब 20,000 योग्य अभ्यर्थी नौकरी पाने से वंचित रह गए। इसके बाद लखनऊ हाईकोर्ट की डबल बेंच ने 13 अगस्त 2024 को पुरानी मेरिट लिस्ट रद्द कर दी थी। कोर्ट ने सरकार को तीन महीने में नई सूची बनाने का आदेश दिया था, लेकिन सरकार ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी।
नियुक्ति के इंतजार में बीते सात साल
सरकार के इस कदम के कारण यह कानूनी प्रक्रिया और लंबी खींचती चली गई। अब इस पूरी भर्ती प्रक्रिया को शुरू हुए लगभग सात साल का लंबा समय बीत चुका है। इसके बावजूद भटक रहे योग्य अभ्यर्थियों को अब तक नियुक्ति पत्र नहीं मिल सका है, जिससे युवाओं का धैर्य अब पूरी तरह टूट रहा है।
Author: Ajay Mishra


