Delhi News: देश में इन दिनों खुले में नमाज़ पढ़ने और गाय की कुर्बानी को लेकर भारी सियासी विवाद छिड़ गया है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और कोलकाता हाईकोर्ट के बयानों के बाद राजनीति गर्मा गई है। तमाम राजनीतिक दल इस संवेदनशील मुद्दे पर खुलकर अपनी राय रख रहे हैं।
सीएम योगी आदित्यनाथ और कोलकाता हाईकोर्ट के सख्त फैसले
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दोटूक कहा है कि सड़क नमाज़ पढ़ने की जगह नहीं है। उन्होंने सुझाव दिया कि लोग मस्जिद में शिफ्ट के अनुसार अपनी नमाज़ पूरी कर सकते हैं। इसके साथ ही आगामी बकरीद त्योहार से ठीक पहले कोलकाता हाईकोर्ट ने भी एक बड़ा फैसला सुनाया है।
अदालत ने एक याचिका पर सुनवाई के दौरान स्पष्ट कहा कि गाय की कुर्बानी त्योहार का अनिवार्य हिस्सा नहीं है। इन दोनों फैसलों के आते ही देश के राजनीतिक गलियारों में बयानबाजी तेज़ हो गई है। विभिन्न राज्यों के क्षेत्रीय दल इस पर अपनी अलग प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
नीतीश कुमार की जेडीयू ने गाय पर दिया बड़ा बयान
जनता दल यूनाइटेड (JDU) के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने इस विवाद पर अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा कि बदलते दौर में गाय के नाम पर राजनीति करना सही विषय नहीं है। गाय हमारे लिए हमेशा से ही एक बेहद पवित्र और गहरी आस्था का सम्मानजनक विषय रही है।
जेडीयू नेता ने आगे कहा कि गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने का फैसला पूरी तरह केंद्र सरकार का काम है। उन्होंने तर्क दिया कि अगर बकरीद में कुर्बानी का चलन है, तो प्रसिद्ध माँ कामाख्या के पावन दरबार में भी सदियों से पशुओं की बलि दी जाती रही है।
राष्ट्रीय जनता दल ने बीजेपी की नीतियों को कटघरे में खड़ा किया
इस पूरे विवाद पर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि हम सब गाय को पालते हैं और उसका पूरा सम्मान करते हैं। सनातन धर्म में गाय का दूध पवित्र मानकर सीधे देवताओं पर चढ़ाया जाता है।
आरजेडी नेता ने भारतीय जनता पार्टी पर हमला बोलते हुए कहा कि बीजेपी ने तो गायों को भी कई नस्लों में बाँट दिया है। वे लोग जर्सी गाय को असली गाय ही नहीं मानते। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में भले ही कुर्बानी को ठीक न माना हो, लेकिन देवियों पर बलि चढ़ती है।
Author: Harikarishan Sharma

