इबोला का कहर: WHO ने घोषित किया वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल, ‘बंडिबुग्यो’ वायरस से बढ़ा खतरा

DRC News: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कांगो और युगांडा में फैल रहे इबोला वायरस के प्रकोप को देखते हुए इसे “वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल” (PHEIC) घोषित कर दिया है। यह इबोला का ‘बंडिबुग्यो’ स्ट्रेन है, जो बेहद संक्रामक माना जा रहा है। वर्तमान में इसके मामलों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, जिससे पूरे विश्व में अलर्ट जारी कर दिया गया है।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पूर्वी कांगो के इतुरी प्रांत में अब तक 246 संदिग्ध मामले और 80 मौतें दर्ज की गई हैं। इसके अलावा, युगांडा में भी संक्रमण के दो मामलों की पुष्टि हुई है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए WHO ने अंतरराष्ट्रीय समन्वय और सतर्कता पर जोर दिया है, क्योंकि इस विशेष स्ट्रेन के लिए अभी कोई स्वीकृत टीका या उपचार उपलब्ध नहीं है।

बंडिबुग्यो स्ट्रेन की चुनौतियां

यह इबोला का वही खतरनाक प्रकार है जिसकी पहचान पहली बार 2007 में हुई थी। विशेषज्ञ बताते हैं कि बंडिबुग्यो स्ट्रेन सामान्य ‘जायर’ स्ट्रेन से अलग है। फिलहाल इसके लिए बाजार में कोई विशेष वैक्सीन या दवा मौजूद नहीं है, जो स्वास्थ्य एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। संक्रमण का प्रसार तेजी से होने की आशंका जताई जा रही है।

संक्रमण मुख्य रूप से संक्रमित व्यक्ति के शारीरिक द्रवों जैसे खून, लार, उल्टी या पसीने के सीधे संपर्क से फैलता है। असुरक्षित अंतिम संस्कार प्रक्रियाएं भी इसे फैलाने में मुख्य भूमिका निभाती हैं। हालांकि यह वायरस सामान्य परिस्थितियों में हवा के माध्यम से नहीं फैलता है, फिर भी भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में इसके फैलने का खतरा बना रहता है।

बचाव और स्वास्थ्य सतर्कता

इस वायरस से बचने के लिए स्वच्छता सबसे प्रभावी हथियार है। साबुन या सैनिटाइजर से नियमित हाथ धोएं और किसी भी संक्रमित व्यक्ति के शरीर से निकलने वाले तरल पदार्थों के संपर्क में आने से बचें। अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण के सख्त नियमों का पालन अनिवार्य है। संदिग्ध मरीज को तुरंत आइसोलेट करना चाहिए ताकि संक्रमण को आगे फैलने से रोका जा सके।

इबोला के प्रमुख लक्षणों में अचानक तेज बुखार, अत्यधिक कमजोरी, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द और गले में खराश शामिल हैं। यदि किसी व्यक्ति में उल्टी, दस्त या आंतरिक रक्तस्राव जैसे गंभीर लक्षण दिखें, तो बिना देरी किए चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए। स्वास्थ्य एजेंसियां आम जनता को अफवाहों से बचने और केवल आधिकारिक दिशानिर्देशों का पालन करने की सलाह दे रही हैं।

Author: Asha Thakur

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