Delhi News: भारत के कॉरपोरेट जगत में काम करने वाले युवा कर्मचारियों की सेहत को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। एक एआई-संचालित कॉरपोरेट स्वास्थ्य मंच द्वारा किए गए ताजा राष्ट्रीय सर्वेक्षण के मुताबिक, देश का हर तीसरा कॉरपोरेट कर्मचारी असामान्य एलडीएल (LDL) यानी खराब कोलेस्ट्रॉल के स्तर से पीड़ित है। सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि इनमें से अधिकांश पेशेवर अपने 20 और 30 साल के शुरुआती दौर में हैं।
इस राष्ट्रीय स्वास्थ्य सर्वेक्षण के आंकड़े बताते हैं कि देश में लगभग 30.9 प्रतिशत कर्मचारियों में खराब कोलेस्ट्रॉल का स्तर असामान्य पाया गया है। इसके अलावा, शरीर के लिए जरूरी माने जाने वाले एचडीएल (HDL) यानी अच्छे कोलेस्ट्रॉल का स्तर भी 37 प्रतिशत कर्मचारियों में असंतुलित मिला है। चिकित्सा विशेषज्ञों का साफ कहना है कि यह गंभीर स्थिति देश के युवाओं में तेजी से बढ़ रहे शुरुआती हृदय रोग के संकट का एक बड़ा संकेत है।
खराब जीवनशैली और सालाना स्वास्थ्य जांच की सीमाएं
नई दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. गौतम नाइक के अनुसार, आजकल के युवा कॉरपोरेट पेशेवर दिल की बीमारियों के शुरुआती लक्षण दिखा रहे हैं। उन्होंने बताया कि दफ्तरों में लंबे समय तक डेस्क पर बैठे रहना, काम की निरंतर समय सीमा, खराब नींद और अनियमित खानपान इस समस्या को लगातार बढ़ा रहे हैं। सामान्य तौर पर भारतीय लोग पश्चिमी देशों की तुलना में करीब एक दशक पहले ही दिल की बीमारियों के शिकार हो रहे हैं।
चिकित्सा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि दिल की बीमारियों का खतरा शरीर में बहुत चुपचाप और बिना किसी बड़े लक्षण के बढ़ता है। कर्मचारी अक्सर सालाना होने वाली रूटीन जांच की रिपोर्ट को बहुत गंभीरता से नहीं लेते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि सिर्फ एकल लिपिड प्रोफाइल या एलडीएल मार्कर पर ध्यान केंद्रित करना पूरी तरह सही नहीं है। इसके बजाय कर्मचारियों को ब्लड शुगर, इंसुलिन रेजिस्टेंस, शरीर की चर्बी और विटामिन की कमी जैसे कई संकेतकों को एक साथ देखना चाहिए।
जागरूकता के बाद भी एक्शन न लेना बन रहा जानलेवा
स्वास्थ्य रिपोर्ट में चेतावनी के संकेत दिखने के बाद भी ज्यादातर कर्मचारी अपनी लाइफस्टाइल में कोई बदलाव नहीं करते हैं। जब तक कोई आपातकालीन स्थिति या बड़ा लक्षण सामने नहीं आता, तब तक लोग डॉक्टर के पास जाने से बचते हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, यह व्यवहारिक लापरवाही बेहद खतरनाक है। लंबे समय तक इन शुरुआती मार्करों की अनदेखी करने से आगे चलकर अचानक हार्ट अटैक, गंभीर उच्च रक्तचाप या कार्डिएक अरेस्ट जैसी जानलेवा स्थितियां पैदा हो जाती हैं।
एकिनकेयर के सह-संस्थापक डॉ. नोएल काउटिन्हो का कहना है कि जब शरीर में कई मार्कर एक साथ बिगड़ने लगते हैं, तो वे दिल के वास्तविक जोखिम की सटीक तस्वीर पेश करते हैं। इन सभी पैरामीटर्स को सामूहिक रूप से देखकर ही समय रहते इलाज शुरू किया जा सकता है। इसी बदलाव को देखते हुए अब कई बड़ी कंपनियां अपने कर्मचारियों को केवल सालाना जांच देने के बजाय, उन्हें अपनी रिपोर्ट को समझने और डॉक्टरों से समय पर परामर्श लेने के लिए लगातार जागरूक कर रही हैं।
एसएमएफजी इंडिया क्रेडिट के एचआर ऑप्स प्रमुख डिनाकर के राज के अनुसार, कंपनियों ने अब नियमित स्क्रीनिंग को आयु-आधारित हृदय जोखिम आकलनों के साथ जोड़ना शुरू कर दिया है। इसमें लिपिड प्रोफाइलिंग और HbA1c के साथ जरूरत पड़ने पर ट्रेडमिल टेस्ट भी शामिल किए जा रहे हैं। कॉरपोरेट इंडिया के लिए यह आंकड़े एक बड़ी चेतावनी हैं कि दिल की सेहत का उम्र से अब कोई सीधा संबंध नहीं रह गया है, इसलिए समय रहते सतर्क होना जरूरी है।

