Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों ने आम जनता को गहरी चिंता में डाल दिया है। राजधानी शिमला में ईंधन के दाम आसमान छू रहे हैं। तेल की ताजा बढ़ोतरी ने लोगों की जेब पर भारी अतिरिक्त बोझ डाल दिया है, जिससे हर वर्ग परेशान है।
शिमला में पेट्रोल अब 99 रुपये 11 पैसे और डीजल 90 रुपये 97 पैसे प्रति लीटर बिक रहा है। हाल ही में पेट्रोल में 85 पैसे और डीजल में 88 पैसे की बढ़ोतरी हुई है। इस अचानक आई तेजी के बाद प्रदेश के कई पेट्रोल पंपों पर गाड़ियों की लंबी कतारें लग गई हैं।
हिमाचल के पेट्रोल पंपों पर तेल भराने की मची होड़
ईंधन की कमी और भविष्य में और महंगाई बढ़ने की आशंका से लोगों में भारी पैनिक देखा जा रहा है। लोग अपने वाहनों की टंकी फुल करवाने के लिए पेट्रोल पंपों पर दौड़ रहे हैं। इस वजह से स्थानीय पेट्रोल पंपों पर अचानक दबाव बहुत ज्यादा बढ़ गया है।
हिमाचल प्रदेश पेट्रोल ट्रेडर एसोसिएशन ने दावा किया है कि अगले 15 से 20 दिनों तक कीमतें लगातार बढ़ सकती हैं। राज्य के करीब 700 पेट्रोल पंपों पर रोज लगभग 5 लाख लीटर ईंधन की खपत होती है। यहां कुल 24 लाख 48 हजार से अधिक वाहन पंजीकृत हैं।
आंकड़ों के मुताबिक हिमाचल में हर 89वें व्यक्ति के पास अपना वाहन मौजूद है। कमर्शियल गाड़ियों, बसों और ट्रैक्टरों की बड़ी संख्या के कारण ईंधन महंगा होने का सीधा असर अब दिखने लगा है। इससे राज्य में परिवहन, खेती, कारोबार और आम आदमी की जिंदगी बुरी तरह प्रभावित होगी।
खाड़ी देशों के संकट से ऑयल कंपनियों ने की सप्लाई में कटौती
एसोसिएशन के महासचिव अमित नंदा ने बताया कि प्रदेश में पेट्रोल, डीजल और घरेलू गैस की सप्लाई मांग के मुताबिक नहीं मिल रही है। खाड़ी देशों में जारी युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऑयल कंपनियों ने ईंधन की आपूर्ति में भारी कटौती कर दी है।
कंपनियां फिलहाल मई 2025 की मांग के आधार पर ही तेल भेज रही हैं, जबकि वर्तमान मांग अचानक बढ़ गई है। तेल संकट की अफवाहों से घबराकर लोग जरूरत से ज्यादा ईंधन खरीद रहे हैं। सीमित स्टोरेज क्षमता के कारण ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों में स्थिति ज्यादा गंभीर हो गई है।
शिमला के पेट्रोल पंप मैनेजर देवेंद्र भंडारी के अनुसार 15 मई के बाद से अचानक रेट बढ़ गए हैं। डिपो से पर्याप्त सप्लाई नहीं आने और ग्राहकों की भारी भीड़ से संकट गहरा गया है। हर कोई अपनी गाड़ी की टंकी फुल कराने की कोशिश में जुटा हुआ है।
ईंधन की बढ़ती कीमतों पर आम जनता और विपक्ष का फूटा गुस्सा
महंगाई को लेकर आम जनता में सरकार के खिलाफ भारी नाराजगी साफ दिखाई दे रही है। सरकारी कर्मचारियों और वाहन चालकों का कहना है कि इतने महंगे ईंधन में परिवार चलाना मुश्किल हो गया है। डीजल महंगा होने से किसानों की खेती की लागत भी काफी बढ़ जाएगी।
इस बीच एक सेवानिवृत्त प्रिंसिपल प्रदीप शर्मा ने अजीब तर्क दिया कि गाड़ियों का इस्तेमाल कम करने के लिए पेट्रोल 150 रुपये होना चाहिए। हालांकि, उन्होंने डीजल की कीमतों को बढ़ाने का कड़ा विरोध किया। उनका मानना है कि डीजल महंगा होने से मालभाड़ा और जरूरी वस्तुएं महंगी होती हैं।
दूसरी तरफ कांग्रेस नेता विनोद जिंटा ने केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि पांच राज्यों के चुनाव खत्म होते ही तेल के दाम बढ़ा दिए गए। आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल की कीमतें और अधिक बढ़ने से संकट गहरा सकता है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक तेल कंपनियों को पेट्रोल-डीजल की बिक्री पर प्रति लीटर करीब 22 रुपये का घाटा हो रहा है। इसी घाटे की भरपाई के लिए आने वाले दिनों में कीमतें और बढ़ेंगी। इससे पर्यटन, कृषि और आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी पर सीधा असर पड़ेगा।
Author: Sunita Gupta

