Noida News: चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में एक अभूतपूर्व सफलता सामने आई है। यथार्थ सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के चिकित्सकों ने एक 80 वर्षीय बुजुर्ग मरीज के पेट से बिना कोई बाहरी चीरा लगाए ट्यूमर को सफलतापूर्वक निकाल दिया है। इस आधुनिक और न्यूनतम आक्रामक एंडोस्कोपिक प्रक्रिया के बाद मरीज को महज 24 घंटे के भीतर अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। पारंपरिक ओपन सर्जरी के मुकाबले यह रिकवरी समय बेहद असाधारण माना जा रहा है।
अस्पताल से मिली जानकारी के मुताबिक बुजुर्ग मरीज को मुंह से खून बहने की गंभीर समस्या के बाद आपातकालीन स्थिति में भर्ती कराया गया था। जांच के दौरान डॉक्टरों ने उनके पेट के ऊपरी हिस्से में एक बहुत बड़ा ट्यूमर देखा। सामान्य तौर पर पेट के इस संवेदनशील हिस्से में मौजूद ट्यूमर को निकालने के लिए डॉक्टरों को बड़ी ओपन सर्जरी करनी पड़ती है। पारंपरिक सर्जरी में बड़े चीरे, असहनीय दर्द और हफ्तों का समय लगता है।
एंडोस्कोपिक फुल-थिकनेस रिसेक्शन तकनीक से हुआ चमत्कार
मरीज की नाजुक उम्र को देखते हुए डॉक्टरों ने एक बेहद आधुनिक मार्ग चुना। इस जटिल ऑपरेशन के लिए एंडोस्कोपिक फुल-थिकनेस रिसेक्शन (EFTR) तकनीक का इस्तेमाल किया गया। गैस्ट्रोएंटरोलॉजी और हेपेटोलॉजी विभाग के सलाहकार डॉ. ध्रुव कांत मिश्रा ने बताया कि ट्यूमर पेट की दीवार के अंदरूनी हिस्से में था। यह शरीर का ऐसा कोना है जहां पहुंचना सर्जनों के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण और मुश्किल काम माना जाता है।
इस आधुनिक प्रक्रिया के तहत डॉक्टरों ने एक लचीले एंडोस्कोप को मरीज के मुंह के रास्ते पेट के भीतर प्रवेश कराया। इसके बाद फुल-थिकनेस प्लिकेशन डिवाइस की मदद से बिना पेट खोले ही ट्यूमर को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। ट्यूमर हटने के बाद पेट की दीवार में जो छिद्र बना, उसे भी डॉक्टरों ने बिना किसी बाहरी टांके या चीरे के अंदरूनी तौर पर पूरी तरह सील कर दिया।
बुजुर्गों और गंभीर मरीजों के लिए वरदान बनी नई तकनीक
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार एंडोस्कोपिक फुल-थिकनेस रिसेक्शन एक ऐसी अत्याधुनिक प्रणाली है जो पाचन तंत्र के गहरे हिस्सों में मौजूद ट्यूमर को आसानी से निकाल देती है। इस तकनीक के कारण शरीर पर कोई निशान नहीं बनता, दर्द न के बराबर होता है और संक्रमण का खतरा भी बेहद कम रहता है। इसके साथ ही मरीज बहुत जल्दी सामान्य रूप से खाना-पीना और घूमना-फिरना शुरू कर देता है।
डॉ. मिश्रा ने स्पष्ट किया कि यह तकनीक उन बुजुर्गों के लिए जीवनदायिनी है जो बड़ी सर्जरी का दबाव नहीं झेल सकते। विशेषकर मधुमेह, हृदय रोग या कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले मरीजों के लिए यह वरदान है। जहां पुरानी सर्जिकल पद्धति में मरीज को 10 दिनों तक अस्पताल में तड़पना पड़ता था, वहीं इस आधुनिक इलाज की बदौलत यह बुजुर्ग मरीज अगले ही दिन हंसते हुए अपने घर लौट गया।

